दैनिक खबरनामा । जम्मू, 20 जून : राजकीय मेडिकल कॉलेज (GMC) जम्मू के आर्थोपेडिक्स विभाग ने चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए पहली बार घुटने के ऑस्टियोआर्थराइटिस से पीड़ित मरीज का स्टेम सेल थेरेपी के माध्यम से सफल उपचार किया है। इस उपलब्धि के साथ GMC जम्मू देश के उन चुनिंदा सरकारी चिकित्सा संस्थानों में शामिल हो गया है, जहां घुटनों की इस गंभीर समस्या के इलाज में आधुनिक स्टेम सेल तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, स्टेम सेल थेरेपी ऑस्टियोआर्थराइटिस के हल्के और मध्यम स्तर के मरीजों में बीमारी की प्रगति को धीमा करने तथा कई मामलों में टोटल नी रिप्लेसमेंट (घुटना प्रत्यारोपण) सर्जरी की आवश्यकता को टालने में मददगार साबित हो सकती है। यह एक डे-केयर प्रक्रिया है, जिसमें मरीज को उपचार के उसी दिन अस्पताल से छुट्टी दी जा सकती है।
लंबे समय से घुटनों के दर्द से जूझ रही थीं मरीज
यह प्रक्रिया शुक्रवार को बोन एंड ज्वाइंट अस्पताल में आर्थोपेडिक्स विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. बियास देव ने डॉ. ताहिर अफजल और डॉ. टडील राशीद की टीम के साथ मिलकर संपन्न की। उपचार प्राप्त करने वाली 65 वर्षीय बिश्नो देवी, जिला सांबा के बैंगलार क्षेत्र की निवासी हैं और लंबे समय से ऑस्टियोआर्थराइटिस के कारण घुटनों के असहनीय दर्द से परेशान थीं। हालांकि वह घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी करवाने की इच्छुक थीं, लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें स्टेम सेल थेरेपी का विकल्प सुझाया, जिसे उन्होंने स्वीकार किया और उपचार सफल रहा।
माइनस 90 डिग्री पर सुरक्षित रखी जाती हैं स्टेम सेल्स
चिकित्सकों ने बताया कि स्टेम सेल थेरेपी की सबसे बड़ी चुनौती कोशिकाओं की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए आवश्यक कोल्ड-चेन प्रणाली को कायम रखना है। स्टेम सेल्स को माइनस 90 डिग्री सेल्सियस तापमान पर तरल नाइट्रोजन चैम्बर में सुरक्षित रखा और परिवहन किया जाता है, जिससे उनकी प्रभावशीलता बनी रहती है।
आयुष्मान भारत योजना के तहत मिला नि:शुल्क उपचार
इस अत्याधुनिक उपचार के लिए आवश्यक सामग्री आयुष्मान भारत योजना के तहत उपलब्ध कराई गई, जिसके कारण मरीज को किसी प्रकार का आर्थिक बोझ नहीं उठाना पड़ा। मरीज और उनके परिजनों ने उपचार करने वाली चिकित्सकीय टीम तथा GMC प्रशासन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से GMC जम्मू के प्रिंसिपल डॉ. आशुतोष गुप्ता का धन्यवाद किया, जिनके प्रयासों से यह आधुनिक सुविधा मरीजों को बिना किसी अतिरिक्त लागत के उपलब्ध हो सकी।
चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि जम्मू-कश्मीर में आर्थोपेडिक उपचार के क्षेत्र में एक नई शुरुआत साबित होगी और भविष्य में ऑस्टियोआर्थराइटिस से पीड़ित मरीजों को अधिक प्रभावी एवं आधुनिक उपचार विकल्प उपलब्ध कराने का मार्ग प्रशस्त