हरियाणा 1 मार्च 2026( दैनिक खबरनामा) हरियाणा के पंचकूला स्थित आसरेवाली जंगल क्षेत्र में खैर के पेड़ों की बड़े पैमाने पर अवैध कटाई का मामला सामने आया है। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि तस्करों ने हजारों पेड़ों को काटकर जंगल से बाहर निकाला है। मामला प्रदेश के पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह के संज्ञान में आने के बाद वन विभाग में हड़कंप मच गया।
मंत्री के निर्देश पर शनिवार सुबह विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की टीम ने मौके पर पहुंचकर सर्च अभियान शुरू किया। जांच के लिए एक विशेष कमेटी का गठन भी किया गया है। मुख्य वन्य जीव अधिकारी और आईएफएस अधिकारी बी निवेदिता के नेतृत्व में टीम कटे हुए पेड़ों की गिनती और नुकसान का आकलन कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, जांच में ताजा और पुराने दोनों तरह के कटान को शामिल किया जा रहा है।प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि तस्कर काफी समय से सुनियोजित तरीके से पेड़ों की कटाई कर रहे थे और लकड़ी को धीरे-धीरे जंगल से बाहर ले जाया जा रहा था। हरियाणा में खैर के पेड़ों की कटाई पर पूरी तरह प्रतिबंध है, लेकिन बाजार में इसकी ऊंची कीमत—करीब 16 हजार रुपये प्रति क्विंटल—के कारण तस्करी की घटनाएं बढ़ रही हैं। प्रदेश में खैर के पेड़ मुख्य रूप से मोरनी और यमुनानगर डिवीजन के जंगलों में पाए जाते हैं, जहां पहले भी कटान की शिकायतें आती रही हैं।
सूत्रों के अनुसार, करीब डेढ़ वर्ष पहले जंगल क्षेत्र को क्षेत्रीय विंग से हटाकर वाइल्ड लाइफ विंग के अधीन कर दिया गया था। मैनपॉवर की कमी के कारण निगरानी व्यवस्था कमजोर पड़ने की बात सामने आई है। पहले वन रक्षकों के साथ सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की व्यवस्था भी थी, जो अब प्रभावित बताई जा रही है।
विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एवं मूल्यांकन टीम को तीन दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। टीम यह भी जांच करेगी कि कटान किस अवधि में हुआ और तस्करी का तरीका क्या था। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने के बाद संबंधित लोगों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई जाएगी।