हरियाणा 10 जनवरी (दैनिक खबरनामा)पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि सशस्त्र बलों में सेवा के दौरान यदि कोई अधिकारी भर्ती के समय पूरी तरह चिकित्सकीय रूप से फिट पाया गया हो, लेकिन बाद में उसे दिव्यांगता का सामना करना पड़े, तो वह दिव्यांगता पेंशन का हकदार होगा, भले ही दिव्यांगता का आकलन 20 प्रतिशत से कम ही क्यों न हो।
यह फैसला केंद्र सरकार द्वारा दायर उस याचिका को खारिज करते हुए दिया गया, जिसमें सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (AFT), चंडीगढ़ के 15 सितंबर 2023 के आदेश को चुनौती दी गई थी। न्यायाधिकरण ने केंद्र सरकार को आदेश दिया था कि पूर्व सैनिक कश्मीर सिंह को दिव्यांगता पेंशन का लाभ दिया जाए।AFT के आदेश के अनुसार, कश्मीर सिंह की दिव्यांगता 6 से 10 प्रतिशत आंकी गई थी, जिसे नियमों के तहत राउंड ऑफ कर 50 प्रतिशत माना गया और उन्हें यह लाभ 1 मई 2001 से 30 अप्रैल 2003 तक दो वर्षों के लिए प्रदान करने के निर्देश दिए गए थे।हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यदि कोई सैनिक भर्ती के समय पूरी तरह स्वस्थ था और सेवा के दौरान उसे दिव्यांगता हुई, तो उसे दिव्यांगता पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता। इस निर्णय को पूर्व सैनिकों के अधिकारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण और राहतभरा फैसला माना जा रहा है।

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