पंजाब 30 जनवरी 2026 (दैनिक खबरनामा ) पंजाब के लिए एक बेहद चिंताजनक और डराने वाली तस्वीर सामने आई है। राज्य से गुजरने वाले नेशनल हाईवे पर सड़क हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब में नेशनल हाईवे पर औसतन हर 8 घंटे में एक गंभीर सड़क दुर्घटना हो रही है, जिनमें से करीब 75 प्रतिशत मामलों में लोगों की मौत हो जाती है। यह खुलासा गुरुवार को संसद में पेश की गई वार्षिक सड़क सुरक्षा रिपोर्ट में हुआ है।
रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 में पंजाब में नेशनल हाईवे पर कुल 111 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 858 लोगों ने अपनी जान गंवाई। यह आंकड़ा न केवल भयावह है, बल्कि यह राज्य की ट्रैफिक व्यवस्था और सड़क सुरक्षा प्रणाली पर भी बड़े सवाल खड़े करता है।पिछले पांच सालों में नहीं सुधरी हालत
आंकड़ों पर नजर डालें तो बीते पांच वर्षों में सड़क हादसों का ग्राफ लगातार ऊंचा बना हुआ है।साल 2024 में 1912 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 1562 लोगों की मौत हुई।साल 2023 में 2388 हादसों में 1895 लोगों ने दम तोड़ा।साल 2022 में 2293 दुर्घटनाओं में 1881 मौतें दर्ज की गईं।वहीं, साल 2021 में 2288 हादसों में 1950 लोगों की जान चली गई।ये आंकड़े साफ तौर पर दर्शाते हैं कि सड़क सुरक्षा को लेकर किए जा रहे प्रयास अब तक नाकाफी साबित हुए हैं।तेज रफ्तार और लापरवाही बनी मौत की वजह सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पंजाब में सड़क हादसों के पीछे सबसे बड़ा कारण तेज गति से वाहन चलाना, ट्रैफिक नियमों की अनदेखी, ओवरटेकिंग की होड़ और ओवरलोडिंग है। हाईवे पर भारी वाहनों की अत्यधिक आवाजाही, ट्रकों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की ओवरलोडिंग तथा रात के समय खराब विजिबिलिटी भी दुर्घटनाओं को बढ़ा रही है।रिपोर्ट के मुताबिक, केवल ओवरलोडिंग के कारण ही पिछले पांच वर्षों में 2,725 लोगों की जान चली गई, जो कि पूरे परिवहन तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करता है।सड़कों और वाहनों की खराब स्थिति भी जिम्मेदार
हादसों के पीछे सिर्फ मानवीय लापरवाही ही नहीं, बल्कि सड़कों की खराब हालत, अधूरी सड़क परियोजनाएं, संकेतक बोर्डों की कमी, खराब स्ट्रीट लाइटिंग और वाहनों की तकनीकी खामियां भी अहम कारण मानी जा रही हैं। कई नेशनल हाईवे हिस्सों में गड्ढे, अधूरी सर्विस रोड और अव्यवस्थित कट्स हादसों को न्योता दे रहे हैं।
केंद्र सरकार का बड़ा कदम: एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लागू होगा लगातार बढ़ते सड़क हादसों को देखते हुए केंद्र सरकार ने सभी राज्यों में एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATMS) को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का फैसला किया है। यह सिस्टम चार लेन या उससे अधिक चौड़ाई वाले सभी नेशनल हाईवे पर लागू किया जाएगा।इस आधुनिक सिस्टम के तहत सीसीटीवी कैमरे, ऑटोमैटिक स्पीड डिटेक्शन, ट्रैफिक मॉनिटरिंग, इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम और डिजिटल चालान व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा, ताकि नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई की जा सके और हादसों में कमी लाई जा सके।सख्ती और जागरूकता दोनों जरूरी विशेषज्ञों का कहना है कि केवल तकनीकी व्यवस्था से ही सड़क हादसे नहीं रुकेंगे। इसके लिए सख्त कानून लागू करना, ओवरलोडिंग पर कड़ी कार्रवाई, नियमित वाहन जांच और लोगों को ट्रैफिक नियमों के प्रति जागरूक करना बेहद जरूरी है। साथ ही, स्कूल और कॉलेज स्तर पर सड़क सुरक्षा शिक्षा को भी अनिवार्य किया जाना चाहिए।
जरूरत है सामूहिक जिम्मेदारी की तेजी से बढ़ते सड़क हादसे न केवल प्रशासन के लिए, बल्कि आम जनता के लिए भी गंभीर चेतावनी हैं। जब तक हर नागरिक ट्रैफिक नियमों का पालन करने को अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेगा, तब तक सड़क सुरक्षा का सपना अधूरा ही रहेगा।