पंजाब 31 जनवरी 2026 ( दैनिक खबरनामा ) पंजाब में 852 सरकारी स्कूलों की इमारतों को नीले और पीले रंग से रंगे जाने के फैसले ने राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि स्कूलों की रंगाई-पुताई में सत्तारूढ़ दल के झंडे जैसे रंगों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे सरकारी संसाधनों के राजनीतिक उपयोग का संदेश जाता है।विवाद उस समय गहराया जब शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश के साथ रंगों के नमूने भी सामने आए। इन नमूनों में नीला और पीला रंग प्रमुख है, जिसे विपक्ष ने सत्ताधारी पार्टी के प्रतीक रंगों से जोड़ते हुए आपत्ति जताई। विपक्ष का कहना है कि शिक्षा से जुड़े संस्थानों को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए।सरकार की ओर से इन आरोपों को सिरे से खारिज किया गया है। शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि स्कूलों की रंगाई पूरी तरह तकनीकी और प्रशासनिक आधार पर की जा रही है। जिन स्कूलों में पिछले पांच साल या उससे अधिक समय से पेंट नहीं हुआ है, उन्हें इस योजना में शामिल किया गया है। रंगों का चयन विभागीय मानकों के अनुसार किया गया है, न कि किसी राजनीतिक सोच के तहत।पहले चरण में राज्य के 23 जिलों के स्कूलों को इस योजना में शामिल किया गया है। इसके लिए करीब 17 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की गई है। सबसे ज्यादा स्कूल संगरूर जिले में शामिल हैं, जबकि अमृतसर, लुधियाना, रोपड़ समेत कई अन्य जिलों के स्कूलों को भी नए रंग दिए जाएंगे।हालांकि सरकार का कहना है कि यह कदम स्कूलों की आधारभूत संरचना को बेहतर बनाने के लिए उठाया गया है, लेकिन विपक्ष इसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश बता रहा है। इस मुद्दे पर आने वाले दिनों में राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।