दैनिक खबरनामा । श्रीनगर, 23 जून : जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल ने कहा है कि ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए नवाचार और प्रौद्योगिकी को गांवों तथा पंचायतों तक पहुंचाना आवश्यक है। उन्होंने पंचायतों में ‘विलेज इनोवेशन लैब्स’ स्थापित करने की वकालत करते हुए कहा कि इन्हें नवाचार, डिजिटल सुशासन, जवाबदेही और जनविश्वास के सशक्त केंद्रों के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।
श्रीनगर स्थित (एसकेआईसीसी) में आयोजित पंचायत-नेतृत्व वाली सेवा वितरण पर क्षेत्रीय कार्यशाला ‘सेवा से समृद्धि’ को संबोधित करते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर नवाचार और तकनीक के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है। अब आवश्यकता है कि इन उपलब्धियों का लाभ गांवों तक पहुंचे, ताकि प्रत्येक नागरिक विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभा सके।
उन्होंने पंचायतों के बीच ज्ञान और अनुभवों के आदान-प्रदान पर बल देते हुए कहा कि यदि किसी राज्य की सफल पंचायत मॉडल को दूसरे राज्यों में अपनाया जाए, तो इससे सुशासन को मजबूती मिलने के साथ-साथ राष्ट्रीय एकता भी सुदृढ़ होगी।
उपराज्यपाल ने कहा कि पंचायतों के नेतृत्व में निर्बाध और पारदर्शी सेवा वितरण आधुनिक प्रशासन की आधारशिला है। उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर में पहले प्रभावी त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था का अभाव था, लेकिन इसके लागू होने के बाद जमीनी लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए व्यापक सुधार किए गए। पंचायतों को धन, कार्य और कर्मचारियों का हस्तांतरण सुनिश्चित कर उन्हें विकास योजनाओं में प्रभावी भागीदारी का अधिकार दिया गया।
सिन्हा ने कहा कि पंचायत राज संस्थाओं के परामर्श से तैयार जिला विकास योजनाओं के परिणामस्वरूप ग्रामीण क्षेत्रों में अनेक जनकल्याणकारी परियोजनाओं का सफल क्रियान्वयन संभव हुआ है।
डिजिटल परिवर्तन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 में प्रशासनिक प्रक्रियाएं अभी भी श्रीनगर और जम्मू के बीच फाइलों के भौतिक आवागमन पर निर्भर थीं। आज प्रशासन व्यापक डिजिटल बदलाव से गुजर चुका है और अधिकांश सरकारी सेवाएं ऑनलाइन माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही हैं।
उपराज्यपाल ने बताया कि जम्मू-कश्मीर में 1,100 से अधिक सरकारी सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध हैं, जिससे केंद्र शासित प्रदेश डिजिटल सेवा वितरण के क्षेत्र में अग्रणी इकाइयों में शामिल हो गया है। वहीं ‘बैक टू विलेज’ और ‘ब्लॉक दिवस’ जैसे कार्यक्रमों ने प्रशासन और जनता के बीच संवाद को मजबूत किया है।
उन्होंने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश में 15,000 से अधिक कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) संचालित हो रहे हैं। साथ ही 4,290 पंचायतों में से 4,211 पंचायतें डिजिटल नेटवर्क से जुड़ चुकी हैं, जो 98 प्रतिशत से अधिक कनेक्टिविटी को दर्शाता है। शेष पंचायतें दूरदराज और सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थित हैं, जहां कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने के प्रयास जारी हैं।
सिन्हा ने कहा कि डिजिटल लेन-देन में हुई उल्लेखनीय वृद्धि डिजिटल प्रशासनिक तंत्र के प्रति जनता के बढ़ते विश्वास का प्रमाण है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भविष्य की पंचायत केवल प्रशासनिक इकाई नहीं, बल्कि नवाचार, समान अवसर, सतत विकास और जनभागीदारी का सशक्त मंच होनी चाहिए, जहां नागरिकों को घर-द्वार पर सेवाएं, त्वरित शिकायत निवारण और पारदर्शी प्रशासन उपलब्ध हो।