अयोध्या 30 दिसम्बर (जगदीश कुमार)अगर 2025 को तस्वीरों में देखा जाए, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कभी अयोध्या में धर्म ध्वजा फहराते नजर आते हैं, तो कभी बिहार की जनसभा में गमछा घुमाकर भीड़ का अभिवादन करते हुए। ये तस्वीरें केवल कार्यक्रमों की नहीं, बल्कि उस राजनीतिक शैली की झलक हैं, जिसमें भावनाएं, प्रतीक और संवाद अहम भूमिका निभाते हैं।अयोध्या में आयोजित धार्मिक आयोजन के दौरान मोदी का पारंपरिक वेश और वैदिक प्रतीकों का प्रयोग यह संकेत देता है कि सरकार सांस्कृतिक विरासत को विकास की धुरी मानकर आगे बढ़ रही है। वहीं बिहार में मंच से उनका आत्मीय अंदाज़, स्थानीय बोली और पहनावे के साथ, जनता के बीच खासा असर छोड़ता दिखा।साल 2025 में प्रधानमंत्री ने युवाओं, महिलाओं और किसानों से जुड़े कई अभियानों की शुरुआत भी की। लेकिन इन सबके बीच जो बात सबसे अलग रही, वह थी हर राज्य की संस्कृति के साथ खुद को जोड़ने की उनकी कोशिश। यही वजह है कि 2025 को मोदी के राजनीतिक सफर में “जनसंपर्क और प्रतीकों का वर्ष” कहा जा रहा है।

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