मध्य प्रदेश 10 जनवरी(दैनिक खबरनामा)मंडला जिले के एकीकृत शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जामगांव से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक छात्रा ने स्कूल की शिक्षिका और प्राचार्य पर मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं।
घटना के बाद स्कूल परिसर में हड़कंप मच गया, जब छात्रा रोती-बिलखती हुई स्कूल से बाहर निकली और अपने साथ हुए कथित दुर्व्यवहार की शिकायत की।छात्रा का आरोप है कि स्कूल की एक शिक्षिका उसे लगातार प्रताड़ित करती रही। उसके दोस्तों के सामने उसकी बेइज्जती की जाती है, पढ़ाई को लेकर ताने मारे जाते हैं और स्कूल छोड़ने तक की धमकी दी जाती है। छात्रा का कहना है कि प्राचार्य ने भी उससे यह कह दिया कि उसका नाम स्कूल से काट दिया गया है।छात्रा के पिता ने बताया कि उनकी बेटी पहले भी स्कूल में हो रहे व्यवहार की शिकायत कर चुकी थी। उनका आरोप है कि स्कूल में पढ़ाई का माहौल ठीक नहीं है और उनकी बेटी को सभी छात्रों के सामने अपमानित किया जाता है। पिता का कहना है कि उनकी बेटी ने दसवीं कक्षा में 68 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं, इसके बावजूद उसे पढ़ाई को लेकर अपमानित किया गया।मामले को लेकर गांव के लोगों में भी नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल में शिक्षा का स्तर गिरता जा रहा है और बच्चों के साथ व्यवहार भी ठीक नहीं है, जिसकी वजह से ऐसे हालात बन रहे हैं।वहीं स्कूल की प्राचार्य ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि छात्रा का आचरण ठीक नहीं था और किसी भी शिक्षक द्वारा उसकी बेइज्जती नहीं की गई। प्राचार्य के अनुसार, छात्रा को नियमों के उल्लंघन पर डांटा गया था, क्योंकि वह मोबाइल फोन विद्यालय लेकर आई थी।फिलहाल मामले की शिकायत संबंधित शिक्षा विभाग तक पहुँचा दी गई है। अब शिक्षा विभाग की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।बहरहाल, सवाल यही है कि जब शिक्षा के मंदिर में ही छात्र खुद को असुरक्षित महसूस करने लगें, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होती है?