डेराबस्सी 28 दिसम्बर (जगदीश कुमार)पंजाब की धरती ने एक बार फिर गंगा-जमुनी तहज़ीब और आपसी भाईचारे की मजबूत मिसाल पेश की है। डेराबस्सी में मुस्लिम वेलफेयर कमेटी (8360) की ओर से छोटे साहिबजादों और माता गुजरी जी की शहादत की स्मृति में लंगर का आयोजन किया गया। इस आयोजन के माध्यम से धार्मिक सौहार्द, इंसानियत और आपसी सम्मान का संदेश दिया गया।इतिहास में दर्ज है कि मुगल शासक वजीर खान के आदेश पर छोटे साहिबजादों को दीवार में जिंदा चिनवा दिया गया था। उनकी इसी अमर शहादत को याद करते हुए मुस्लिम समाज ने श्रद्धा भाव से सिर झुकाया और गुरु परंपरा के सम्मान में लंगर सेवा की।लंगर में सभी धर्मों और समुदायों के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। आयोजकों ने कहा कि साहिबजादों की कुर्बानी सिर्फ सिख समाज की नहीं, बल्कि पूरी मानवता की धरोहर है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने युवाओं से इतिहास से सीख लेने और समाज में प्रेम, सद्भाव और एकता बनाए रखने की अपील की। स्थानीय लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे पंजाब की साझा संस्कृति की सच्ची तस्वीर बताया।इस आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया कि धर्म अलग हो सकते हैं, लेकिन इंसानियत एक है, और यही पंजाब की असली पहचान है।
