28 दिसम्बर (जगदीश कुमार)जयपुर की सामाजिक और सार्वजनिक जीवन की पहचान बन चुके लियाकत अली पठान आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। लोग उन्हें प्यार से “लियाकत भाई” कहकर संबोधित करते हैं। वे सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि सेवा, भरोसे और इंसानियत की जीवंत मिसाल हैं, जिनका नाम आते ही समाजसेवा और ज़मीनी संघर्ष की तस्वीर सामने आ जाती है।गरीब, असहाय, युवा हो या बुज़ुर्ग—हर ज़रूरतमंद के लिए लियाकत अली पठान का दिल और दरवाज़ा हमेशा खुला रहता है। शिक्षा सहायता, आर्थिक मदद, कंबल वितरण या रोज़मर्रा की मूलभूत ज़रूरतों की बात हो, वे हर मोर्चे पर आगे खड़े नज़र आते हैं। उनकी सेवा का उद्देश्य न तो प्रचार है और न ही दिखावा, बल्कि इसे वे इबादत और इंसानियत का फर्ज़ मानते हैं।राजनीतिक जीवन में भी लियाकत अली पठान ने ईमानदारी और निष्ठा के साथ अपनी भूमिका निभाई है। वे कांग्रेस पार्टी से पूर्व पार्षद रह चुके हैं और डीसीसी के उपाध्यक्ष के रूप में भी उन्होंने संगठन को मजबूती दी। जनसेवा उनके परिवार की परंपरा का हिस्सा रही है—उनकी बहन नाजमीन पठान भी पूर्व पार्षद रह चुकी हैं, जो इस परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रमाण है।लियाकत अली पठान की सबसे बड़ी ताकत है सामाजिक सौहार्द। हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई—सभी धर्मों और समाजों को समान दृष्टि से देखना, भाईचारे को मजबूत करना और लोगों को जोड़ना उनके व्यक्तित्व की पहचान है। वे पद या ओहदे से नहीं, बल्कि अपने कर्मों और सेवाभाव से पहचाने जाते हैं।आज जयपुर की धरती पर लियाकत अली पठान का नाम सेवा का पर्याय, भरोसे की पहचान और इंसानियत की सशक्त मिसाल बन चुका है।
