चंडीगढ़ 15 जनवरी( जगदीश कुमार) चंडीगढ़।पिछले पांच वर्षों से गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रही चंडीगढ़ नगर निगम (एमसी) अब धीरे-धीरे आर्थिक स्थिरता की ओर बढ़ रही है। यूटी प्रशासन से मिले सहयोग, अनुदान में वृद्धि, अपनी आय के बेहतर संग्रह और खर्च पर सख्त नियंत्रण के चलते नगर निगम की वित्तीय स्थिति में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है।चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीनों (अप्रैल से दिसंबर 2025) के दौरान नगर निगम की कुल प्राप्तियां 28 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 879.16 करोड़ रुपये तक पहुंच गईं। यह वृद्धि मुख्य रूप से अनुदान (ग्रांट-इन-एड) में 34 प्रतिशत की बढ़ोतरी, निगम की अपनी आय में 19 प्रतिशत की वृद्धि और खर्च में लगभग 5 प्रतिशत की कटौती के कारण हुई।नगर निगम आयुक्त अमित कुमार ने हाल ही में पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया को निगम की बेहतर होती वित्तीय स्थिति की जानकारी दी। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, प्रशासक द्वारा स्वीकृत अतिरिक्त 150 करोड़ रुपये के अनुदान ने इस सुधार में अहम भूमिका निभाई। इसके चलते अनुदान राशि बढ़कर 593.75 करोड़ रुपये हो गई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 487 करोड़ रुपये थी।इसके अलावा, चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा वी-3 सड़कों की मरम्मत और री-कार्पेटिंग का जिम्मा अपने हाथ में लेने से नगर निगम को करीब 50 करोड़ रुपये के खर्च से राहत मिली है।
वहीं,नगर निगम ने बकायेदारों से वसूली अभियान भी तेज किया है। इसके तहत 333.16 करोड़ रुपये के लंबित संपत्ति कर और जल शुल्क बकाया में से 39.57 करोड़ रुपये की वसूली की गई है।
अधिकारियों का कहना है कि यदि यह रुझान जारी रहा तो आने वाले समय में नगर निगम पूरी तरह वित्तीय संकट से बाहर निकल सकता है।