चंडीगढ़ 21 जनवरी (दैनिक खबरनामा) चंडीगढ़ की पहचान मानी जाने वाली सुखना झील के लगातार सूखने को लेकर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने बुधवार को गहरी चिंता जताई। उन्होंने बिल्डर माफिया, नौकरशाहों और राजनीतिक संरक्षण की कथित मिलीभगत को झील के विनाश के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए तीखी मौखिक टिप्पणी की।मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ 1995 में दायर जनहित याचिका ‘इन री: टी.एन. गोदावर्मन थिरुमुलपद’ में दाखिल अंतरिम आवेदनों पर सुनवाई कर रही थी। इसी दौरान एक वकील ने सुखना झील से जुड़ा मामला उठाया।
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा,और कितना सुखाओगे सुखना झील को? नौकरशाहों की मिलीभगत और राजनीतिक संरक्षण के साथ अवैध निर्माण हो रहे हैं, जिससे झील पूरी तरह तबाह हो रही है। वहां बिल्डर माफिया सक्रिय हैं।”पीठ ने यह भी सवाल उठाया कि जंगलों और झीलों से जुड़े अधिकांश मामले सीधे सुप्रीम कोर्ट में क्यों लाए जा रहे हैं, जबकि इन्हें पहले उच्च न्यायालयों में उठाया जाना चाहिए। अदालत ने इस प्रवृत्ति पर नाराज़गी जताते हुए कहा कि 1995 की लंबित जनहित याचिका में अंतरिम आवेदनों के माध्यम से लगातार नए मुद्दे जोड़े जा रहे हैं।मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति बागची ने प्रारंभिक टिप्पणी में कहा कि वन एवं पर्यावरण से जुड़े मामलों के लिए एक व्यवस्थित न्यायिक प्रक्रिया का पालन किया जाना आवश्यक है।सुप्रीम कोर्ट की इस सख्त टिप्पणी के बाद सुखना झील के संरक्षण, अवैध निर्माण और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।