चंडीगढ़ 11 फरवरी 2026( दैनिक खबरनामा ) चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने दहेज उत्पीड़न से जुड़े एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि यदि कोई महिला पहले पति से तलाक लिए बिना दूसरा विवाह करती है, तो वह दूसरे व्यक्ति को कानूनी रूप से अपना पति नहीं मान सकती और ऐसे में उसके खिलाफ धारा 498-A के तहत दहेज उत्पीड़न का मामला दर्ज नहीं कराया जा सकता।हाईकोर्ट ने फिरोजपुर की अदालत द्वारा आरोपी व्यक्ति के खिलाफ जारी समन आदेश को रद्द कर दिया। यह मामला एक महिला की शिकायत पर दर्ज हुआ था, जिसमें उसने दावा किया था कि उसका विवाह हरजिंदर सिंह से हुआ और शादी के बाद दहेज के लिए लगातार दबाव बनाया गया। महिला ने आरोप लगाया था कि विदाई के समय कार की मांग की गई और बाद में परिवार ने तीन लाख रुपये भी दिए, बावजूद इसके उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया।हालांकि आरोपी पक्ष ने हाईकोर्ट में दलील दी कि शिकायतकर्ता महिला का विवाह पहले 2005 में गुरमीत सिंह से हुआ था और तलाक की याचिका 2013 में दाखिल हुई थी, लेकिन वह खारिज हो चुकी थी। साथ ही कोर्ट को यह भी बताया गया कि महिला ने पहले एक और व्यक्ति से शादी करने की बात भी स्वीकार की थी, जिसका तलाक नहीं हुआ।जस्टिस शालिनी नागपाल ने कहा कि धारा 498-A का अधिकार केवल कानूनी पति और उसके परिवार के खिलाफ लागू होता है। यदि विवाह हिंदू विवाह अधिनियम के तहत वैध नहीं है तो आरोपी को पति नहीं माना जा सकता। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने समन आदेश रद्द कर याचिका मंजूर कर ली।
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