हरियाणा में डीजीपी नियुक्ति और कार्यकाल को लेकर कानूनी बहस तेज
चंडीगढ़ 16 दिसंबर हरियाणा सरकार द्वारा संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को एम्पेनेलमेंट के लिए पांच वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का पैनल भेजा जाएगा। इसमें शत्रुजीत का नाम भी शामिल होगा, क्योंकि उनकी आईपीएस सेवा में अभी छह महीने शेष हैं। उनके अलावा पैनल में 1991 बैच के संजीव कुमार जैन, 1992 बैच के अजय सिंघल, 1993 बैच के आलोक मित्तल और अर्शिंदर सिंह चावला के नाम शामिल होंगे। यूपीएससी इन नामों में से तीन अधिकारियों का पैनल राज्य सरकार को भेजेगा, जिसमें से एक को हरियाणा का डीजीपी नियुक्त किया जाएगा। डीजीपी का कार्यकाल दो वर्ष का होगा, भले ही सेवानिवृत्ति की तिथि कोई भी हो।
इसी बीच, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट और कानूनी मामलों के जानकार हेमंत कुमार ने हरियाणा पुलिस अधिनियम, 2007 की धारा 6(2) को लेकर अहम कानूनी बिंदु उठाया है। उन्होंने बताया कि दिसंबर 2018 में संशोधित धारा के अनुसार डीजीपी का कार्यकाल न्यूनतम एक वर्ष और अधिकतम दो वर्ष तक ही हो सकता है। कानून के तहत डीजीपी को सीधे दो वर्ष के लिए नियुक्त नहीं किया जा सकता, बल्कि पहले एक वर्ष और बाद में एक वर्ष का विस्तार ही संभव है।
हेमंत कुमार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के 2006 के प्रकाश सिंह मामले में डीजीपी के न्यूनतम दो वर्ष के निरंतर कार्यकाल का निर्देश दिया गया था, लेकिन अधिकतम सीमा तय नहीं की गई। उन्होंने सरकार से अपील की है कि शीतकालीन सत्र में धारा 6(2) में संशोधन कर डीजीपी के कार्यकाल की अधिकतम सीमा हटाने पर विचार किया जाए, ताकि कानून सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप हो।