दैनिक खबरनामा । चंडीगढ़, 29 जून : पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि यदि किसी चालक ने ड्राइविंग लाइसेंस की वैधता समाप्त होने से पहले उसके नवीनीकरण के लिए आवेदन कर दिया था और बाद में प्रशासनिक कारणों से प्रक्रिया में देरी हुई, तो उसे अवैध लाइसेंसधारी नहीं माना जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि कोविड-19 महामारी के दौरान सरकारी कार्यालयों में कामकाज प्रभावित रहने से हुई देरी का नुकसान वाहन चालक को नहीं उठाना पड़ेगा।

जस्टिस पंकज जैन की पीठ ने न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड द्वारा दायर अपील का आंशिक रूप से निपटारा करते हुए कर्मचारी मुआवजा आयुक्त के आदेश को अधिकांश रूप से बरकरार रखा। हालांकि, अदालत ने ब्याज संबंधी आदेश में संशोधन करते हुए कहा कि 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दुर्घटना की तिथि से नहीं, बल्कि उसके 30 दिन बाद से लागू होगा।

मामला घायल चालक सुखदेव पाल सिंह उर्फ सुखपाल सिंह से जुड़ा है। कर्मचारी मुआवजा आयुक्त ने 27 फरवरी, 2026 को पारित आदेश में चालक को 5,44,725 रुपये मुआवजा, चिकित्सा व्यय तथा 3 मार्च, 2022 से 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का निर्देश दिया था। इस आदेश को बीमा कंपनी ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

अपील में बीमा कंपनी ने दावा किया कि दुर्घटना के समय चालक के पास ट्रांसपोर्ट वाहन चलाने के लिए वैध लाइसेंस नहीं था। कंपनी के अनुसार लाइसेंस के नवीनीकरण में 25 जून, 2021 से 18 नवंबर, 2022 तक का अंतर रहा, इसलिए बीमा दायित्व नहीं बनता। साथ ही यह तर्क भी दिया गया कि कर्मचारी मुआवजा अधिनियम, 1923 की धारा 4ए के तहत ब्याज दुर्घटना की तिथि से नहीं दिया जा सकता।

दूसरी ओर चालक ने अदालत को बताया कि उसने लाइसेंस की अवधि समाप्त होने से पहले, 15 जून, 2021 को ही नवीनीकरण के लिए आवेदन कर दिया था। सुनवाई के दौरान सहायक क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण, होशियारपुर ने रिकॉर्ड के आधार पर पुष्टि की कि आवेदन समय पर प्राप्त हुआ था। हालांकि कोविड-19 महामारी के कारण कार्यालयी कार्य प्रभावित रहने से आवेदन का समय पर निपटारा नहीं हो सका और अंततः 19 नवंबर, 2022 को लाइसेंस के नवीनीकरण को मंजूरी दी गई।

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि चालक ने नियमानुसार समय रहते आवेदन कर दिया था, इसलिए प्रशासनिक स्तर पर हुई देरी का प्रतिकूल प्रभाव उस पर नहीं डाला जा सकता। अदालत ने कर्मचारी मुआवजा आयुक्त द्वारा लाइसेंस की वैधता संबंधी निष्कर्ष को सही माना और बीमा कंपनी की इस आपत्ति को अस्वीकार कर दिया।

हालांकि ब्याज के मुद्दे पर अदालत ने बीमा कंपनी की दलील स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि कर्मचारी मुआवजा अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार ब्याज दुर्घटना की तिथि से 30 दिन बाद से देय होगा। इसी आधार पर आदेश में संशोधन करते हुए हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि मुआवजा राशि पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज 3 मार्च, 2022 के 30 दिन बाद से लेकर वास्तविक भुगतान होने तक दिया

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