दैनिक खबरनामा नई दिल्ली, 29 मई:  अमेरिका के 36 वर्षीय पर्वतारोही टायलर एंड्रयूज़ ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई का नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। उन्होंने नेपाल की ओर स्थित दक्षिण आधार शिविर से एवरेस्ट शिखर तक की कठिन यात्रा मात्र 9 घंटे 55 मिनट में पूरी कर इतिहास रच दिया। इस उपलब्धि के साथ वह नेपाल वाले मार्ग से सबसे तेज चढ़ाई करने वाले पहले विदेशी पर्वतारोही बन गए हैं।
इससे पहले यह रिकॉर्ड नेपाल के प्रसिद्ध पर्वतारोही ल्हाकपा गेलू शेरपा के नाम था, जिन्होंने वर्ष 2003 में 10 घंटे 56 मिनट में एवरेस्ट शिखर तक पहुंचकर नया मानक बनाया था। लगभग दो दशकों तक यह रिकॉर्ड अटूट रहा, लेकिन टायलर की तेज रफ्तार ने इसे पीछे छोड़ दिया।
एवरेस्ट की चढ़ाई को दुनिया की सबसे कठिन चुनौतियों में गिना जाता है। सामान्य तौर पर पर्वतारोहियों को कम ऑक्सीजन और अत्यधिक ठंड वाले वातावरण के अनुरूप खुद को ढालने में कई सप्ताह लग जाते हैं। अधिकतर दल आधार शिविर से शिखर तक पहुंचने में चार से सात दिन का समय लेते हैं। इसके विपरीत टायलर ने पूरी दूरी एक ही रात में तय कर सभी को चौंका दिया।
बताया जा रहा है कि उन्होंने बुधवार शाम लगभग सात बजे अपनी यात्रा शुरू की। रातभर लगातार आगे बढ़ते हुए उन्होंने खतरनाक हिमखंडों, बर्फीली ढलानों और अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र को पार किया। करीब 14 किलोमीटर की कठिन चढ़ाई और लगभग साढ़े तीन हजार मीटर की सीधी ऊंचाई तय करने के बाद वह गुरुवार सुबह शिखर पर पहुंचे।
यह सफलता टायलर को पहली कोशिश में नहीं मिली। पिछले दो वर्षों में वे चार बार असफल रहे थे। कभी मौसम खराब हो गया तो कभी उपकरणों में खराबी आ गई। एक बार अत्यधिक ठंड के कारण उन्हें बीच रास्ते से लौटना पड़ा था। हाल ही में बिना अतिरिक्त ऑक्सीजन के सबसे तेज चढ़ाई का प्रयास करते समय उनकी तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके बाद बचाव दल की मदद लेनी पड़ी।
इन कठिन अनुभवों के बाद उन्होंने अपनी रणनीति बदली और इस बार सीमित ऑक्सीजन सहायता के साथ अंतिम प्रयास करने का निर्णय लिया। विशेष बात यह रही कि उन्होंने यात्रा के बड़े हिस्से तक बाहरी ऑक्सीजन का उपयोग नहीं किया। उनके साथ सहयोगी दल सुरक्षा और आवश्यक सामान के साथ पीछे चल रहा था।
टायलर का जीवन संघर्ष और साहस की मिसाल माना जाता है। बचपन में उन्हें एप्लास्टिक एनीमिया नाम की गंभीर बीमारी हो गई थी, जिसके उपचार के लिए उन्हें लंबे समय तक कठिन चिकित्सा प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। बीमारी को मात देने के बाद उन्होंने खेल और पर्वतारोहण में अपनी पहचान बनाई।
एवरेस्ट से पहले भी वे दुनिया की कई ऊंची चोटियों पर तेज चढ़ाई के लिए जाने जाते रहे हैं। उनके नाम नेपाल, तंजानिया, अर्जेंटीना और इक्वाडोर की कई प्रसिद्ध पर्वत चोटियों पर रिकॉर्ड दर्ज हैं।
अभियान से जुड़े अधिकारियों के अनुसार इस उपलब्धि की औपचारिक पुष्टि के लिए उनके मार्ग संबंधी आंकड़ों, शिखर की तस्वीरों और सहयोगी दल के बयानों की जांच की जाएगी। मंजूरी मिलने के बाद यह रिकॉर्ड आधिकारिक रूप से दर्ज कर लिया जाएगा।

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