चंडीगढ़ 29 दिसंबर (जगदीश कुमार)
हरियाणा सरकार ने भूमि उपयोग परिवर्तन (सीएलयू) की स्वीकृति प्रक्रिया को सरल, तेज और विकेन्द्रीकृत बनाने की दिशा में बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग (डीटीसीपी) ने रेडी मिक्स कंक्रीट (RMC) और हॉट मिक्स प्लांट से संबंधित भूमि उपयोग परिवर्तन की मंजूरी देने के अधिकार अब प्रदेश के सभी जिला उपायुक्तों (DC) को सौंप दिए हैं।विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार यह फैसला हरियाणा नियोजित सड़कें एवं नियंत्रित क्षेत्र अधिनियम, 1963 की धारा 19(2) के तहत राज्य सरकार की पूर्व स्वीकृति के बाद लिया गया है। इसके तहत अब जिला उपायुक्तों को अधिनियम की धारा 8(1) और 8(2) के अंतर्गत सीएलयू स्वीकृत करने का अधिकार प्राप्त होगा।सरकार का मानना है कि इस निर्णय से उद्यमियों और निवेशकों को सीएलयू स्वीकृति के लिए चंडीगढ़ या मुख्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और जिला स्तर पर ही मामलों का त्वरित निपटारा संभव हो सकेगा। यह व्यवस्था 22 मार्च 2023 को लागू की गई नीति के अनुरूप है, जिसमें यह तय किया गया था कि विकास योजनाओं के अंतर्गत आने वाले ऐसे प्रस्तावों का निस्तारण जिला स्तर पर ही किया जाएगा।आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई आवेदन स्थल अंतिम विकास योजना (फाइनल डेवलपमेंट प्लान) का हिस्सा नहीं है, तो ऐसे मामलों में सीएलयू की मंजूरी का अधिकार राज्य सरकार के पास ही रहेगा। ऐसे प्रस्ताव संबंधित उपायुक्त के माध्यम से राज्य सरकार को भेजे जाएंगे।डीटीसीपी विभाग के निदेशक अमित खत्री ने कहा कि यह निर्णय न केवल प्रक्रिया को तेज करेगा, बल्कि पारदर्शिता बढ़ाने के साथ-साथ क्षेत्रीय स्तर पर प्रशासनिक जवाबदेही भी सुनिश्चित करेगा। सरकार के इस कदम को उद्योग और निर्माण क्षेत्र के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा