दैनिक खबरनामा। चंडीगढ़, 7 जून 2026: चंडीगढ़ के महापौर की हालिया टिप्पणी, जिसमें उन्होंने कहा था कि कई बार “चपरासी उनसे अधिक शक्तिशाली प्रतीत होते हैं”, प्रशासनिक व्यवस्था और जवाबदेही को लेकर नई बहस का विषय बन गई है। इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सामाजिक कार्यकर्ता आर.के. गर्ग ने कहा कि यह केवल एक व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं, बल्कि प्रशासनिक तंत्र में मौजूद एक गंभीर समस्या की ओर संकेत करती है।
गर्ग ने कहा कि चंडीगढ़ जैसे सुव्यवस्थित शहर में नागरिकों को सरकारी कार्यालयों में पारदर्शी, सम्मानजनक और सुविधाजनक सेवाएं मिलने की अपेक्षा रहती है। हालांकि, कई विभागों में वर्षों से एक ही स्थान पर कार्यरत क्लास-सी, क्लास-डी और आउटसोर्स कर्मचारियों का प्रभाव इतना बढ़ जाता है कि आम नागरिक स्वयं को असहाय महसूस करने लगते हैं।
उन्होंने कहा कि फाइलों की आवाजाही, अधिकारियों तक पहुंच और कार्यों की प्राथमिकता को लेकर समय-समय पर शिकायतें सामने आती रहती हैं। ऐसे में प्रशासनिक प्रक्रियाओं की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े होते हैं।
गर्ग ने स्पष्ट किया कि सभी कर्मचारियों को एक ही नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि बड़ी संख्या में कर्मचारी पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। लेकिन जहां किसी विभाग या कर्मचारी को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही हों, वहां व्यवस्था की गंभीर समीक्षा आवश्यक हो जाती है।
उन्होंने सुझाव दिया कि प्रशासन को आउटसोर्स तथा अन्य कर्मचारियों के लिए निश्चित कार्यकाल, समयबद्ध स्थानांतरण नीति, नियमित व्यवहार प्रशिक्षण और प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र लागू करना चाहिए। उनके अनुसार किसी भी सरकारी व्यवस्था में प्रभाव और अधिकार का आधार सेवा भावना तथा कार्यकुशलता होनी चाहिए, न कि लंबे समय तक एक ही स्थान पर बने रहना।
आर.के. गर्ग ने कहा कि महापौर की टिप्पणी से भले ही कुछ लोग असहमत हों, लेकिन इसने प्रशासनिक व्यवस्था की एक ऐसी “दुखती रग” को सामने ला दिया है, जिस पर गंभीर आत्ममंथन और सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि नागरिकों के विश्वास को मजबूत करने के लिए प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता को प्राथमिकता देना समय की मांग है।