दैनिक खबरनामा। चंडीगढ़, 8 जून 2026: देशभर के स्कूलों, अदालतों, सरकारी कार्यालयों और अन्य संस्थानों को भेजी जा रही बम धमकियों की जांच में गिरफ्तार बांग्लादेश मूल के आरोपी सौरव विश्वास से पूछताछ के दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच में सामने आया है कि आरोपी ने अपने यूट्यूब चैनल के लिए फर्जी लाइक, कमेंट और सब्सक्राइबर बढ़ाने की खातिर खरीदी गई ई-मेल आईडी में से 219 आईडी बांग्लादेश के एक व्यक्ति को बेच दी थीं। पुलिस को आशंका है कि इन्हीं ई-मेल आईडी का इस्तेमाल देशभर में बम धमकी वाले संदेश भेजने के लिए किया गया।
चंडीगढ़ पुलिस की जांच के अनुसार, सौरव विश्वास ने टेलीग्राम के माध्यम से एक अज्ञात व्यक्ति से करीब 300 पुरानी और निष्क्रिय (डीएक्टिवेटेड) ई-मेल आईडी खरीदी थीं। वह इन आईडी के पासवर्ड रीसेट कर उन्हें सक्रिय करता था और फिर अपने यूट्यूब व फेसबुक अकाउंट पर लाइक, कमेंट और सब्सक्रिप्शन बढ़ाने के लिए उनका इस्तेमाल करता था।
इस तरीके से उसका यूट्यूब चैनल तेजी से लोकप्रिय हुआ और उसके करीब पांच लाख सब्सक्राइबर हो गए। बाद में उसने डिजिटल मार्केटिंग और फेसबुक विज्ञापन तैयार करने जैसे ऑनलाइन कार्य भी शुरू कर दिए। हालांकि कॉपीराइट उल्लंघन के कारण उसका यूट्यूब चैनल बाद में बंद हो गया।
जांच में यह भी सामने आया है कि सौरव विश्वास वर्ष 2017 में एक ब्रोकर की मदद से अवैध रूप से जंगल के रास्ते भारत में दाखिल हुआ था। भारत आने के बाद वह पश्चिम बंगाल में रहने लगा। शुरुआती दिनों में उसने मजदूरी की और बाद में एक साइबर कैफे में काम करते हुए इंटरनेट और तकनीकी गतिविधियों की जानकारी हासिल की।
एक्सेल शीट ने खोला पूरा राज
पुलिस जांच के दौरान पता चला कि आरोपी ने खरीदी और बेची गई सभी ई-मेल आईडी का रिकॉर्ड एक एक्सेल शीट में सुरक्षित रखा था। सूत्रों के मुताबिक, गुजरात पुलिस को सबसे पहले आरोपी से जुड़ा अहम सुराग मिला। पुलिस ने सामान्य खरीदार बनकर टेलीग्राम पर उससे संपर्क किया और ई-मेल आईडी खरीदने की इच्छा जताई।
आरोपी ने बिना शक किए पूरी एक्सेल शीट साझा कर दी। इसी दस्तावेज के आधार पर पुलिस को पता चला कि जिन ई-मेल आईडी से बम धमकियां भेजी जा रही हैं, वे सौरव द्वारा बेची गई थीं। इसके बाद आईपी एड्रेस और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के जरिए जांच एजेंसियां आरोपी तक पहुंच गईं।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि सौरव ने 219 ई-मेल आईडी बांग्लादेश निवासी मामुनुर राशिद को टेलीग्राम के जरिए बेची थीं। यह सौदा 145 यूएसडीटी (क्रिप्टोकरेंसी) में हुआ था, जिसकी भारतीय मुद्रा में कीमत करीब 13 हजार रुपये बताई जा रही है।
जांच एजेंसियों का मानना है कि इन्हीं ई-मेल आईडी का इस्तेमाल बाद में देशभर के विभिन्न संस्थानों को धमकी भरे ई-मेल भेजने में किया गया।
सूत्रों के अनुसार, चंडीगढ़ और मोहाली समेत कई शहरों में स्कूलों, अदालतों, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट, मेयर कार्यालय, पासपोर्ट कार्यालय, डाकघरों, सचिवालय और अन्य सरकारी संस्थानों को बम से उड़ाने की धमकियां मिली थीं। इसी तरह दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और पंजाब के कई संस्थान भी धमकी भरे ई-मेल की जद में आए।
गुजरात पुलिस ने आरोपी के कब्जे से तीन लैपटॉप और तीन मोबाइल फोन बरामद किए थे। डिजिटल फोरेंसिक जांच में ई-मेल आईडी से संबंधित महत्वपूर्ण डेटा मिला। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि धमकी भरे संदेश भेजने में इस्तेमाल की गई ई-मेल आईडी आरोपी द्वारा बेची गई थीं।
गिरफ्तारी के बाद सौरव विश्वास गुजरात पुलिस की हिरासत में रहा। इसके बाद दिल्ली पुलिस, अमृतसर पुलिस और चंडीगढ़ पुलिस ने भी अलग-अलग मामलों में उससे पूछताछ की। चंडीगढ़ पुलिस ने उसे तिहाड़ जेल से प्रोडक्शन वारंट पर लाकर सेक्टर-17 और सेक्टर-3 थाना क्षेत्रों में दर्ज दो एफआईआर के संबंध में पूछताछ की। पूछताछ पूरी होने के बाद उसे पुनः तिहाड़ जेल भेज दिया गया। गौरतलब है कि अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने सौरव विश्वास को 1 मार्च को पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले से गिरफ्तार किया था। मामले की जांच अभी जारी है और सुरक्षा एजेंसियां ई-मेल नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं।