दैनिक खबरनामा। जम्मू, 10 जून: पिछले वर्ष जम्मू-कश्मीर में आई बाढ़, फ्लैश फ्लड, भूस्खलन और बादल फटने जैसी प्राकृतिक आपदाओं से सबक लेते हुए प्रशासन ने आगामी मानसून सीजन के लिए व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने मंगलवार को उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए आपदा प्रबंधन व्यवस्थाओं की समीक्षा की और सभी विभागों को जोखिम कम करने के लिए समय रहते आवश्यक एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए।
बैठक में वरिष्ठ प्रशासनिक सचिवों, एसडीआरएफ, मंडलायुक्त जम्मू और कश्मीर, पुलिस अधिकारियों, बिजली विकास विभाग, लोक निर्माण विभाग तथा सभी जिलों के उपायुक्तों ने भाग लिया।
मुख्य सचिव ने कहा कि बाढ़, फ्लैश फ्लड, भूस्खलन और बादल फटने जैसी घटनाओं से जन-धन की हानि को न्यूनतम करने के लिए मजबूत और समन्वित तैयारी जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आपदा प्रबंधन केवल विभागीय जिम्मेदारी नहीं, बल्कि विभिन्न एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय का विषय भी है।
उन्होंने संवेदनशील और जोखिमग्रस्त क्षेत्रों की पहचान कर उनके लिए विशेष शमन रणनीति तैयार करने के निर्देश दिए। साथ ही स्कूलों, अस्पतालों और अन्य महत्वपूर्ण सरकारी भवनों का सुरक्षा ऑडिट कराने पर भी जोर दिया। बीआरओ, एनएचएआई, पीडब्ल्यूडी और अन्य सड़क निर्माण एजेंसियों को आपदा के दौरान सड़कों और संपर्क मार्गों की त्वरित बहाली सुनिश्चित करने को कहा गया, ताकि राहत एवं बचाव कार्य प्रभावित न हों।
बिजली विकास विभाग को अपने ढांचे और परिसंपत्तियों का जोखिम आकलन कर खराब मौसम में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा पूर्व आपदाओं में क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की स्थायी मरम्मत से जुड़े कार्य जल्द पूरा करने को कहा गया।
आपदा प्रबंधन, राहत, पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव चंद्राकर भारती ने बताया कि मानसून से पहले तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए पिछले कई महीनों से विभिन्न स्तरों पर समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा उपकरणों और आपातकालीन संसाधनों की खरीद के लिए जिलों को पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराई जा चुकी है।
बैठक में बताया गया कि सरकारी भवनों का अग्नि सुरक्षा ऑडिट जारी है तथा उपमंडल मजिस्ट्रेटों और संवेदनशील तहसीलों को सैटेलाइट फोन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जलाशयों और प्राकृतिक जल निकासी मार्गों पर अतिक्रमण रोकने के लिए आपदा प्रबंधन अधिनियम के प्रावधानों का सख्ती से पालन करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
एसडीआरएफ कमांडेंट इम्तियाज हुसैन मीर ने जिला स्तर पर एसडीआरएफ इकाइयों को आधुनिक बचाव उपकरणों से लैस करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने सिविल डिफेंस स्वयंसेवकों की भूमिका मजबूत करने और उनके मानदेय में वृद्धि की भी वकालत की।
जम्मू मंडलायुक्त रमेश कुमार ने बाढ़ नियंत्रण कक्षों, आपातकालीन रिपोर्टिंग प्रणाली, प्रारंभिक चेतावनी तंत्र (अर्ली वॉर्निंग सिस्टम) और सड़क बहाली योजनाओं की जानकारी दी। वहीं कश्मीर मंडलायुक्त अंशुल गर्ग ने घाटी के संवेदनशील गांवों, राहत केंद्रों और बचाव व्यवस्थाओं का ब्यौरा प्रस्तुत किया।
उन्होंने बताया कि प्रत्येक जिले में आपदा तैयारी और त्वरित प्रतिक्रिया के समन्वय के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। आगामी श्री अमरनाथ यात्रा को ध्यान में रखते हुए तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं, जिनमें श्रीनगर स्थित एकीकृत कमांड एवं कंट्रोल सेंटर और पर्वतीय बचाव दलों की तैनाती शामिल है।
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि बडगाम के ओम्पोरा में निर्माणाधीन आपातकालीन संचालन केंद्र (ईओसी) का कार्य अंतिम चरण में पहुंच चुका है और मुख्य भवन जुलाई के अंत तक विभाग को सौंपे जाने की संभावना है।
मुख्य सचिव ने सभी विभागों और जिला प्रशासन को मानसून के दौरान पूरी सतर्कता बनाए रखने, तैयारियों की नियमित समीक्षा करने और किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए आपसी समन्वय मजबूत रखने के निर्देश दिए।