दैनिक खबरनामा। कठुआ, 10 जून: जम्मू-पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग पर मग्गर खड्ड के निकट बुधवार तड़के कबाड़ के एक बड़े डंप में भीषण आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। आग की चपेट में आकर कबाड़ का काम करने वाले मजदूरों और उनके परिवारों की करीब 20 झुग्गियां जलकर राख हो गईं। हादसे में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन दर्जनों परिवारों का आशियाना और घरेलू सामान पूरी तरह नष्ट हो गया।
आग सुबह करीब तीन बजे लगी और इसे पूरी तरह नियंत्रित करने में दमकल विभाग को लगभग दस घंटे का समय लग गया। आग इतनी भयावह थी कि उससे उठने वाले काले धुएं ने पूरे कठुआ शहर को अपनी चपेट में ले लिया। सुबह लोगों को आसमान में काले बादल दिखाई दिए, लेकिन बाद में पता चला कि यह आग से उठ रहा धुआं था, जिससे शहर में प्रदूषण का स्तर भी बढ़ गया।
आग पर काबू पाने के लिए कठुआ के अलावा हीरानगर से भी दमकल वाहनों को बुलाना पड़ा। दोपहर करीब 12 बजे जाकर आग को नियंत्रित किया जा सका। आग लगने के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, जिस स्थान पर कबाड़ जमा किया गया था वहां बड़ी मात्रा में प्लास्टिक के साथ कुछ फैक्ट्रियों से लाए गए रासायनिक पदार्थ भी मौजूद थे। आशंका है कि इन्हीं कारणों से आग तेजी से फैल गई और देखते ही देखते पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया। आग में झुग्गियों के बाहर खड़ी कई मोटरसाइकिलें और साइकिलें भी जलकर राख हो गईं।
झुग्गी में रहने वाली सुनीता देवी ने बताया कि वह अपने पति और बच्चों के साथ सो रही थीं, तभी अचानक तेज रोशनी और गर्मी महसूस हुई। बाहर निकलकर देखा तो आग तेजी से उनकी झुग्गी की ओर बढ़ रही थी। जान बचाने के लिए उन्हें तुरंत बाहर भागना पड़ा। घर में रखा नकद, टीवी, कपड़े और खाने-पीने का सामान सब कुछ आग की भेंट चढ़ गया।
एक अन्य पीड़ित कमलेश कुमार ने बताया कि आग इतनी तेजी से फैली कि लोगों को अपना सामान बचाने का मौका तक नहीं मिला। धुएं और गर्मी के कारण हालात बेहद भयावह हो गए थे। कई छोटे बच्चों को भी मशक्कत के बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया।
स्थानीय निवासी सूरज ने बताया कि आग लगने के बाद लोगों ने बाल्टियों से पानी डालकर आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन आग लगातार फैलती रही। दमकल विभाग को सूचना दी गई, मगर उनके पहुंचने तक आग काफी विकराल रूप ले चुकी थी।
राहत की बात यह रही कि आग आसपास के पक्के मकानों तक नहीं पहुंची, अन्यथा नुकसान कहीं अधिक हो सकता था।
घटना के बाद जिले में अग्निशमन सुविधाओं की कमी भी चर्चा का विषय बन गई है। कठुआ जिले में केवल कठुआ और हीरानगर में ही फायर स्टेशन हैं। पिछले कई दिनों से तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है और जिले के विभिन्न इलाकों में जंगलों में आग लगने की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। ऐसे में स्थानीय लोगों ने जिले में अग्निशमन व्यवस्था को और मजबूत करने की मांग उठाई है।