चंडीगढ़ 30 दिसम्बर (जगदीश कुमार)देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में शामिल पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGI), चंडीगढ़ में टैक्स से जुड़ी बड़ी लापरवाही सामने आई है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट नंबर 250/2023 में खुलासा हुआ है कि PGI प्रबंधन द्वारा जीएसटी नियमों की अनदेखी किए जाने के कारण सरकारी खजाने को करीब 8.06 करोड़ रुपये का सीधा नुकसान हुआ।CAG रिपोर्ट के अनुसार, PGI ने जुलाई 2017 में सुरक्षा सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए एक निजी एजेंसी के साथ करार किया था। इस समझौते की शर्तें पूरी तरह स्पष्ट थीं। करार में साफ तौर पर उल्लेख किया गया था कि एजेंसी द्वारा लिए जाने वाले सेवा शुल्क में सभी प्रकार के कर शामिल होंगे और एजेंसी को GST नियमों का पूरी तरह पालन करना अनिवार्य होगा। इसके बावजूद, जांच में पाया गया कि न तो एजेंसी ने नियमों का सही ढंग से पालन किया और न ही PGI प्रशासन ने इस पर प्रभावी निगरानी रखी।रिपोर्ट में कहा गया है कि सुरक्षा सेवाओं के भुगतान के दौरान जीएसटी से संबंधित प्रावधानों को नजरअंदाज किया गया, जिससे सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ा। यह लापरवाही केवल वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं रही, बल्कि इससे PGI के प्रशासनिक कामकाज और आंतरिक नियंत्रण प्रणाली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।CAG ने अपनी रिपोर्ट में PGI प्रबंधन की भूमिका पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा है कि यदि समय रहते कर नियमों की सही जांच और अनुपालन सुनिश्चित किया जाता, तो सरकारी खजाने को इस नुकसान से बचाया जा सकता था। रिपोर्ट में यह भी संकेत दिए गए हैं कि भविष्य में इस तरह की चूक न हो, इसके लिए मजबूत आंतरिक ऑडिट और निगरानी तंत्र की जरूरत है।
इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग और PGI प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। जानकारों का कहना है कि इतने बड़े संस्थान में इस तरह की टैक्स लापरवाही न केवल चिंताजनक है, बल्कि इससे अन्य सरकारी संस्थानों के लिए भी गलत मिसाल कायम होती है।फिलहाल, CAG रिपोर्ट सामने आने के बाद यह देखना अहम होगा कि PGI प्रशासन और संबंधित विभाग इस नुकसान की भरपाई और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई को लेकर क्या कदम उठाते हैं।

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