दैनिक खबरनामा। जम्मू, 12 जून: करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र श्री अमरनाथ धाम में प्राकृतिक रूप से बनने वाले पवित्र हिमलिंग (बाबा बर्फानी) के भविष्य को लेकर विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान के कारण आने वाले वर्षों में बाबा बर्फानी के समय से पहले अंतर्ध्यान होने की घटनाएं और बढ़ सकती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले लगभग 12 वर्षों में अमरनाथ गुफा क्षेत्र और उसके आसपास जून से अगस्त के दौरान अधिकतम तापमान में करीब 10 डिग्री सेल्सियस तक वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि न्यूनतम तापमान में भी लगभग 4 डिग्री की बढ़ोतरी हुई है। इसका सीधा प्रभाव हिमलिंग के निर्माण और उसके अस्तित्व की अवधि पर पड़ रहा है।
बताया जा रहा है कि पिछले कुछ वर्षों से यात्रा शुरू होने के पहले ही महीने में पवित्र हिमलिंग के अंतर्ध्यान होने की घटनाएं सामने आई हैं। मौसम वैज्ञानिक इसे क्षेत्र में बढ़ते तापमान और बदलते जलवायु पैटर्न से जोड़ रहे हैं।
13 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है पवित्र गुफा
दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के ऊपरी पर्वतीय क्षेत्र में समुद्र तल से करीब 13,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित अमरनाथ गुफा में वर्ष 2012 के दौरान जून से अगस्त के बीच अधिकतम तापमान सामान्यतः 15 से 16 डिग्री सेल्सियस रहता था। वहीं वर्ष 2024 में यह बढ़कर 24 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि वर्ष 2016 के बाद से गुफा क्षेत्र में तापमान में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। पहले जहां आसपास लंबे समय तक बर्फ जमी रहती थी, वहीं अब बर्फ के टिके रहने की अवधि घटती जा रही है।
प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण के लिए किए विशेष इंतजाम
बढ़ते तापमान और पर्यावरणीय दबाव को देखते हुए प्रशासन ने भी कई कदम उठाए हैं। पिछले दो वर्षों से पवित्र गुफा के आसपास टेंट सिटी बसाने की अनुमति नहीं दी जा रही है। साथ ही दर्शन के बाद श्रद्धालुओं को अधिक समय तक क्षेत्र में रुकने के बजाय शीघ्र वापस लौटने के लिए कहा जाता है, ताकि भीड़ और मानव गतिविधियों का प्रभाव कम किया जा सके।
अगले दो दशकों को लेकर चिंता
वर्तमान में अमरनाथ गुफा क्षेत्र का तापमान 18 से 20 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जलवायु परिवर्तन की रफ्तार नहीं थमी और प्रभावी संरक्षण उपाय नहीं किए गए, तो अगले दो दशकों में तापमान में और वृद्धि हो सकती है, जिससे बाबा बर्फानी के प्राकृतिक स्वरूप पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका है।