दैनिक खबरनामा। श्रीनगर, 13 जून: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी ने शनिवार को भरोसा दिलाया कि प्रदेश सरकार विस्थापित कश्मीरी हिंदुओं (कश्मीरी पंडितों) की घाटी में सम्मानजनक वापसी और पुनर्वास सुनिश्चित करने के लिए पूर्व में गठित एपेक्स कमेटी को फिर से सक्रिय करेगी।

श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (एसकेआईसीसी) में आयोजित ‘ग्लोबल कश्मीरी हिंदू कॉन्क्लेव: फ्रॉम एक्साइल टू एक्सीलेंस’ को संबोधित करते हुए वानी ने कहा कि कश्मीरी हिंदुओं की सम्मानजनक वापसी के लिए एक संरचित संवाद तंत्र विकसित करना समय की आवश्यकता है।

उन्होंने बताया कि सरकार कश्मीरी हिंदू समुदाय के प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों को शामिल करते हुए एपेक्स कमेटी को पुनर्जीवित करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। इस संबंध में जल्द ही उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के साथ चर्चा की जाएगी।

वानी ने दोनों समुदायों के बीच संवाद और विश्वास बहाली पर जोर देते हुए कहा कि कश्मीर का इतिहास और भविष्य साझा है। उन्होंने कहा कि कश्मीरी हिंदुओं और मुसलमानों के प्रतिनिधियों को एक मंच पर बैठकर समाधान तलाशना होगा, ताकि वापसी और पुनर्वास की प्रक्रिया को प्रभावी बनाया जा सके।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2009 में गठित एपेक्स कमेटी का उद्देश्य विस्थापित कश्मीरी हिंदुओं की वापसी एवं पुनर्वास प्रक्रिया की निगरानी करना तथा केंद्र सरकार की पुनर्वास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना था।

वानी ने स्वीकार किया कि सरकार द्वारा पुनर्वास पैकेज, ट्रांजिट आवास और अन्य कई योजनाएं शुरू किए जाने के बावजूद अपेक्षित परिणाम नहीं मिल सके हैं। उन्होंने कहा कि जब तक कश्मीरी हिंदू सम्मान और सुरक्षा के साथ घाटी में लौटकर अपने मुस्लिम भाइयों के साथ फिर से नहीं बसते, तब तक कश्मीर की सामाजिक तस्वीर अधूरी रहेगी।

कश्मीर को ‘सूफियों की धरती’ बताते हुए उन्होंने कहा कि दोनों समुदायों का साझा इतिहास और साझा भविष्य है। उन्होंने कहा कि 1990 के दशक में आतंकवाद और उग्रवाद के दौर ने केवल कश्मीरी हिंदुओं को ही नहीं, बल्कि मुस्लिम समुदाय को भी गहरे घाव दिए हैं।

वानी ने दोनों पक्षों से अतीत के आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर संवाद और आपसी विश्वास के जरिए समाधान तलाशने की अपील की। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को एक ही नजरिए से नहीं देखा जा सकता और उस कठिन दौर में भी ऐसे लोग थे जिनके दिल कश्मीरी हिंदुओं के लिए धड़कते थे और आज भी धड़कते हैं।

उन्होंने कहा कि केवल सम्मेलन और समितियां बनाने से उद्देश्य पूरा नहीं होगा। वास्तविक सफलता तब मानी जाएगी जब कश्मीरी पंडित सम्मान, सुरक्षा और विश्वास के साथ अपनी मातृभूमि में लौट सकेंगे। इसके लिए सरकार जल्द ही समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ औपचारिक बातचीत शुरू कर उनकी सुरक्षित और सम्मानजनक वापसी के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार करेगी।

Share to :
Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You May Also Like

तीसरे दिन भी नहीं थमी सफाई कर्मियों की हड़ताल, शहरों में बढ़ी गंदगी से जनजीवन प्रभावित

दैनिक खबरनामा। ऊधमपुर, 31 मई : नगर परिषद और नगर पालिका के…
Share to :

जम्मू-कश्मीर SI भर्ती: ओवरएज अभ्यर्थियों को बड़ा झटका, CAT ने आयु सीमा में छूट की मांग ठुकराई

दैनिक खबरनामा | जम्मू, 1 जून : जम्मू-कश्मीर पुलिस में सब-इंस्पेक्टर (एसआई)…
Share to :

पाक समर्थित हवाला जाल पर बड़ी चोट, जम्मू-कश्मीर में तीन लोग गिरफ्तार

दैनिक खबरनामा। जम्मू 31 मई: कठुआ में आतंकी गतिविधियों को आर्थिक सहायता…
Share to :

नशे और नार्को आतंक के विरुद्ध जम्मू-कश्मीर में सख्त अभियान, पचास दिनों में एक हजार से अधिक तस्कर दबोचे

दैनिक खबरनामा। श्रीनगर 31 मई : जम्मू-कश्मीर में नशे के कारोबार और…
Share to :