दैनिक खबरनामा । चंडीगढ़, 19 जून : सेक्टर-11 स्थित श्री कुमार केमिस्ट शॉप के कैशियर जानकी दास की हत्या मामले में पुलिस जांच के दौरान बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि शूटरों को कैश काउंटर पर चश्मा लगाकर बैठे व्यक्ति को गोली मारने का निर्देश दिया गया था, लेकिन पहचान में हुई चूक के कारण उन्होंने जानकी दास को ही निशाना समझकर गोलियां चला दीं।
पुलिस के अनुसार पूरे हत्याकांड की साजिश फरार आरोपित अमित कुमार ने रची थी। अमित का संपर्क जम्मू के आपराधिक गिरोहों के माध्यम से गैंगस्टर नेटवर्क से हुआ था। वह जेल में बंद एक गैंगस्टर के जरिए इंटरनेट मीडिया पर सक्रिय था और विदेश में बैठे गैंगस्टर गोल्डी बराड़ गिरोह से जुड़े गोल्डी ढिल्लों के संपर्क में था।
जांच में पता चला है कि गोल्डी ढिल्लों के निर्देश जेल में बंद गैंगस्टर रोहित कुमार उर्फ माखन तक पहुंचे और उसने यह जिम्मेदारी अमित कुमार को सौंपी। अमित ने ही शूटरों के ठहरने, हथियार उपलब्ध कराने, मोटरसाइकिल का इंतजाम करने और वारदात की पूरी योजना तैयार की थी।
पुलिस के मुताबिक अमित ने सेक्टर-52 स्थित कजहेड़ी के एक होटल में शूटरों के लिए कमरा बुक करवाया था। वारदात में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल जीरकपुर से मंगवाई गई थी। इतना ही नहीं, उसने दोनों शूटरों के खाने-पीने और खरीदारी तक का खर्च उठाया।
शूटरों को हत्या के बदले मोटी रकम और नेपाल के रास्ते विदेश भेजने का लालच दिया गया था। वारदात से पहले उन पर करीब 25 हजार रुपये खर्च किए गए, लेकिन हत्या के बाद जम्मू पहुंचने पर उन्हें केवल पांच से दस हजार रुपये ही दिए गए।
हत्या की असली वजह से अनजान थे शूटर
पूछताछ में गिरफ्तार आरोपित सन्नी मेहरा और आर्यन शर्मा ने बताया कि उन्हें हत्या के पीछे की वास्तविक वजह नहीं बताई गई थी। दोनों ने अमित कुमार के कहने पर वारदात को अंजाम दिया। सन्नी ने 12वीं और आर्यन ने 10वीं तक पढ़ाई की है। दोनों का कोई बड़ा आपराधिक रिकॉर्ड नहीं मिला है। सन्नी के पिता हलवाई की दुकान पर काम करते हैं, जबकि आर्यन के पिता पुजारी का कार्य करते हैं। पुलिस के अनुसार दोनों चरस के नशे के आदी थे।
होटल के दस्तावेजों से खुली आरोपितों की पोल
हत्या के बाद तीनों आरोपित वॉल्वो बस से दिल्ली पहुंचे और अपने मोबाइल फोन बंद कर दिए। दिल्ली रेलवे स्टेशन के पास एक होटल में कमरा लेने के लिए उन्हें पहचान पत्र देना था, जो उनके मोबाइल में मौजूद था।
आरोपितों ने मोबाइल फोन चालू कर फ्लाइट मोड पर डाला और होटल के वाई-फाई के माध्यम से अपने दस्तावेज साझा किए। यही उनकी सबसे बड़ी गलती साबित हुई। कुछ घंटों बाद वे जम्मू जाने वाली ट्रेन में सवार हो गए और रास्ते में एक मोबाइल फोन फेंक दिया।
हालांकि, पुलिस को होटल से आरोपितों के दस्तावेज मिल गए थे। इसके आधार पर चंडीगढ़ पुलिस की टीमें जम्मू-कश्मीर पहुंचीं। स्थानीय पुलिस और खुफिया एजेंसियों की मदद से आरोपितों के ठिकानों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।