दैनिक खबरनामा ब्यूरो।दुबई, 5 अगस्त। ईरान और ओमान के बीच हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर प्रस्तावित समझौते के तहत ईरान को फारस की खाड़ी में प्रवेश करने वाले जहाजों पर नियंत्रण का अधिकार मिल सकता है। यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है, तो इसे ईरान के पक्ष में अब तक की सबसे बड़ी कूटनीतिक रियायतों में से एक माना जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, समझौते में इस बात पर सहमति बन चुकी है कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से खाड़ी की ओर आने वाले जहाजों की निगरानी और नियंत्रण में ईरान की प्रमुख भूमिका होगी। हालांकि, “नियंत्रण” की परिभाषा और उसके दायरे को लेकर अभी भी बातचीत जारी है। खाड़ी के देशों का आग्रह है कि जहाजों के निरीक्षण की निगरानी क्षेत्रीय देशों के संयुक्त पर्यवेक्षण में हो तथा किसी भी प्रकार का शुल्क स्वैच्छिक आधार पर लिया जाए।
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे पर भी सवाल उठाए गए हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि जलडमरूमध्य को फिर से पूरी तरह खोलने संबंधी समझौता जल्द होने वाला है। क्षेत्रीय सूत्रों का कहना है कि समझौते की दिशा में प्रगति जरूर हुई है, लेकिन कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अभी अंतिम निर्णय बाकी है।
ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि समझौते के मसौदे में खाड़ी की ओर आने वाले जहाजों पर ईरान के नियंत्रण का प्रावधान शामिल है। हालांकि, जलडमरूमध्य से बाहर जाने वाले जहाजों पर ईरान की भूमिका को लेकर अभी भी दोनों पक्षों के बीच चर्चा जारी है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बग़ाई ने तेहरान और मस्कट के बीच चल रही वार्ता को “पेशेवर” और “सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती हुई” बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित समुद्री मार्ग के भौगोलिक मानकों पर आपसी समझ बन चुकी है। यदि किसी तीसरे पक्ष की ओर से बाधा नहीं आती है, तो दोनों देशों का संयुक्त बयान अंतिम समीक्षा और मसौदा तैयार करने के चरण में है।
दूसरी ओर, अमेरिका लगातार यह कहता रहा है कि वह किसी भी ऐसे समझौते को स्वीकार नहीं करेगा, जिससे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा व्यापार मार्ग तक पहुंच पर ईरान का नियंत्रण स्थापित हो। इसके बावजूद, ट्रंप और उनके प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने हाल के दिनों में संकेत दिए हैं कि फरवरी में शुरू हुए संघर्ष को समाप्त करने के लिए समझौता निकट हो सकता है।
वाशिंगटन की ओर से इस प्रस्तावित समझौते पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
गौरतलब है कि पिछले कई महीनों से अमेरिका द्वारा किए गए सैन्य अभियानों, जिनमें जुलाई में दो सप्ताह तक चले हवाई हमले भी शामिल हैं, के बावजूद हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पर ईरान का प्रभाव कम नहीं हो सका है। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने जुलाई में राष्ट्रपति ट्रंप को यह भी बताया था कि कुछ महत्वपूर्ण हथियारों और गोला-बारूद का भंडार तेजी से घट रहा है।