दैनिक खबरनामा । जम्मू, 28 जून : पीडीपी नेता इल्तिजा मुफ़्ती ने रविवार को सरकारी विभागों में बढ़ती आउटसोर्स भर्ती को लेकर उमर अब्दुल्ला सरकार से जवाब तलब किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा किए गए आंकड़ों के आधार पर आरोप लगाया कि विभिन्न निजी एजेंसियों के माध्यम से कर्मचारियों की नियुक्ति पर हर वर्ष सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं और इस पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
अपने पोस्ट में इल्तिजा मुफ़्ती ने पूछा कि निजी कंपनियों को सरकारी कार्यों के लिए कर्मचारियों की भर्ती का अधिकार किस आधार पर दिया गया। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि इन कंपनियों का चयन किस प्रक्रिया के तहत किया गया और क्या नियुक्तियों से जुड़े अनुबंधों तथा चयन संबंधी दस्तावेजों को सार्वजनिक किया जाएगा।
सोशल मीडिया पर साझा किए गए विवरण में कई सरकारी विभागों और संस्थानों में लागू आउटसोर्सिंग व्यवस्था का उल्लेख किया गया है। इनमें संस्कृति, स्कूल शिक्षा, युवा सेवा एवं खेल, परिवहन, जनजातीय मामले, श्रम एवं रोजगार, वित्त, समाज कल्याण, उच्च शिक्षा, ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, कौशल विकास सहित अन्य विभाग शामिल हैं।
जारी आंकड़ों के अनुसार, स्कूल शिक्षा विभाग में विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से अनुबंध आधारित कर्मचारी, व्यावसायिक प्रशिक्षक (वोकेशनल ट्रेनर), वोकेशनल कोऑर्डिनेटर तथा सफाई कर्मी नियुक्त किए गए हैं। इन कर्मचारियों पर विभाग का वार्षिक व्यय 12,01,57,752 रुपये बताया गया है।
वहीं, समाज कल्याण विभाग के तहत मिशन वात्सल्य योजना में 1185 पदों समेत अन्य नियुक्तियां आउटसोर्स की गई हैं, जिन पर सालाना 20,37,52,158 रुपये खर्च होने की जानकारी दी गई है।
आंकड़ों के मुताबिक ग्रामीण विकास विभाग ने 52 पदों की आउटसोर्स भर्ती पर 43.25 करोड़ रुपये की राशि खर्च की है। इसके अलावा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में जीएमसी जम्मू, जीएमसी श्रीनगर, जीएमसी अनंतनाग, जीएमसी बारामुला, जीएमसी कठुआ और जीएमसी डोडा से जुड़े अस्पतालों सहित कई संस्थानों में आउटसोर्स कर्मचारियों पर करोड़ों रुपये व्यय किए जा रहे हैं।
इल्तिजा मुफ़्ती ने सूची में शामिल निजी कंपनियों के चयन की प्रक्रिया को सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कोई पारदर्शी और योग्यता आधारित भर्ती प्रणाली नहीं अपनाई गई, तो उम्मीदवारों का चयन किस मानदंड के आधार पर किया गया। साथ ही उन्होंने भर्ती और अनुबंध से जुड़े सभी रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग भी की।