दैनिक खबरनामा । चंडीगढ़, 1 जुलाई : सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन को बड़ा झटका देते हुए 17 जुलाई 2020 को जारी उस अधिसूचना को निरस्त कर दिया, जिसमें ‘आवश्यक सेवा प्रदाता’ का दायरा बढ़ाकर छोले-भटूरे, कुलचे-छोले, परांठे, तंदूर, फल-सब्जी विक्रेताओं और धार्मिक स्थलों के बाहर फूल बेचने वालों को विशेष श्रेणी में शामिल किया गया था।
कोर्ट ने कहा कि यह अधिसूचना कोविड-19 महामारी के आपात हालात में लाई गई थी। अब हालात सामान्य होने के कारण इसकी प्रासंगिकता खत्म हो गई है। लिहाजा 2020 से पहले लागू नियम ही फिर से प्रभावी होंगे।
दरअसल, कोरोना काल में मंदिरों के बाहर फूल बेचने वालों, बाजारों में फल-सब्जी विक्रेताओं, छोले-भटूरे और परांठे वालों को व्यापार की अनुमति दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद यह छूट वापस ले ली गई है।
न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति नोंगमेकापम कोटिश्वर सिंह की पीठ ने टिप्पणी की कि महामारी के दौरान बनाई गई व्यवस्था को अनिश्चितकाल तक जारी नहीं रखा जा सकता। सुनवाई के दौरान नियुक्त एमिकस क्यूरी ने भी कहा कि ‘आवश्यक सेवा प्रदाता’ की विस्तारित परिभाषा का गलत इस्तेमाल हो रहा था और मूल मकसद प्रभावित हो रहा था। अदालत ने इस तर्क से सहमति जताते हुए अधिसूचना रद्द कर दी।
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन और नगर निगम को आदेश दिया कि सभी अधिकृत रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को तय वेंडिंग जोन में शीघ्र शिफ्ट किया जाए। इन जोन में पीने का पानी, शौचालय, साइन बोर्ड और अन्य बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिए कि सभी वेंडरों को स्मार्ट कार्ड जारी किए जाएं, छह महीने के भीतर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और लंबित अपीलों का समयबद्ध निपटारा किया जाए। प्रशासन को 22 जुलाई तक अनुपालन रिपोर्ट सौंपनी होगी। इस मामले पर अगली सुनवाई 24 जुलाई को तय की गई है।