दैनिक खबरनामा । चंडीगढ़, 3 जुलाई: पीजीआई की न्यू ओपीडी स्थित कैंटीन में डीजल से चलने वाले चूल्हों के इस्तेमाल का मामला सामने आए 40 दिन से ज्यादा हो गए हैं, मगर अस्पताल की एस्टेट शाखा और प्रशासन ने अब तक कोई निर्णायक कदम नहीं उठाया है।
23 मई को कैंटीन में डीजल चूल्हों के उपयोग की पड़ताल के लिए एक जांच समिति बनाई गई थी। एक महीना पूरा होने पर भी समिति ने अपनी जांच रिपोर्ट नहीं सौंपी है।
एस्टेट शाखा के एक अधिकारी के अनुसार, इस मामले में जांच रिपोर्ट आने में अभी और देरी हो सकती है। इसकी वजह यह है कि समिति के सदस्य प्रोफेसर 15 तारीख तक अवकाश पर हैं। ऐसे में यह सवाल खड़ा हो रहा है कि जांच समिति में ऐसे सदस्यों को क्यों रखा गया जो जांच के दौरान छुट्टी पर जाने वाले थे।
कैंटीन चलाने वाले ने वाणिज्यिक गैस सिलेंडर का खर्च बचाने के लिए नियमों को ताक पर रखकर तीन डीजल चूल्हों का इस्तेमाल किया। अस्पताल जैसे संवेदनशील परिसर में डीजल चूल्हों का प्रयोग आग लगने की बड़ी आशंका पैदा कर रहा था। अगर कोई लापरवाही होती तो न्यू ओपीडी में गंभीर हादसा हो सकता था, जिससे हजारों मरीजों और उनके परिजनों की जान जोखिम में पड़ सकती थी।
विशेषज्ञ बोले: जांच के लिए सात दिन काफी थे
विशेषज्ञों का मानना है कि डीजल चूल्हे के मामले में बनी समिति को ज्यादा से ज्यादा एक सप्ताह में रिपोर्ट देनी चाहिए थी। अस्पताल परिसर में चूल्हे का इस्तेमाल पूरी तरह वर्जित है, इसके बावजूद कैंटीन संचालक इनका उपयोग कर रहा था, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ गया था।
एस्टेट शाखा ने भेजा था नोटिस
मामले की जानकारी मिलने पर एस्टेट शाखा ने मौके पर पहुंचकर तीनों चूल्हों को कब्जे में ले लिया था। इसके बाद कैंटीन संचालक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। जवाब न देने पर ठेका रद्द करने की चेतावनी भी दी गई थी। संचालक ने तीन दिन के अंदर जवाब दाखिल कर दिया, लेकिन अब तक कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई है।