पंजाब की शिक्षा व्यवस्था पर भी उठाए सवाल, बोले—18,015 शिक्षक पद खाली, 1,113 स्कूलों में प्रिंसिपल नहीं
दैनिक खबरनामा चंडीगढ़, 12 सितंबर। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर गुलज़ार सिंह की आत्महत्या के मुद्दे से जनता का ध्यान भटकाने के लिए कथित तौर पर अपने ‘प्रॉक्सी’ संगठन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। वड़िंग ने गुलज़ार सिंह की आत्महत्या के लिए पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा को जिम्मेदार ठहराते हुए उनके इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग दोहराई।
वड़िंग ने पंजाब की शिक्षा व्यवस्था की कथित तौर पर प्रशंसा करने को लेकर CJP की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि AAP सरकार के कार्यकाल में राज्य की शिक्षा व्यवस्था की स्थिति लगातार खराब हुई है और ऐसे में सरकार के समर्थन में किसी संगठन की ओर से किए जा रहे दावों पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि CJP AAP का प्रॉक्सी संगठन है और खुले तौर पर तथा पर्दे के पीछे सरकार के एजेंडे को आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि जब गुलज़ार सिंह आत्महत्या मामले में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा की बर्खास्तगी को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ रहा था, उसी दौरान CJP के कार्यकर्ताओं को पंजाब के स्कूलों का तथाकथित ऑडिट करने के लिए भेजा गया।
वड़िंग के मुताबिक, इस कवायद का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था की स्थिति को लेकर बहस खड़ी कर गुलज़ार सिंह की आत्महत्या के गंभीर मुद्दे से जनता का ध्यान हटाना था। उन्होंने कहा कि सरकार को उम्मीद थी कि शिक्षा के मुद्दे को आगे लाकर गुलज़ार सिंह मामले को पीछे धकेला जा सकेगा, लेकिन कांग्रेस ऐसा नहीं होने देगी।
उन्होंने कहा, “चीमा को इस्तीफा देना होगा और जेल जाना होगा। हम यह सुनिश्चित करेंगे।”
18 हजार से ज्यादा शिक्षक पद खाली
वड़िंग ने पंजाब की शिक्षा व्यवस्था के आंकड़े पेश करते हुए कहा कि राज्य में स्वीकृत 1,03,052 शिक्षक पदों में से 18,015 पद खाली पड़े हैं। इसके अलावा राज्य के 1,927 सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में से 1,113 स्कूलों में प्रिंसिपल नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों और प्रशासनिक कर्मचारियों की कमी सामान्य सरकारी स्कूलों तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार के महत्वाकांक्षी ‘स्कूल्स ऑफ एमिनेंस’ कार्यक्रम में भी स्टाफ की कमी बनी हुई है। उनके अनुसार, इन स्कूलों में 140 से अधिक पद खाली हैं।
वड़िंग ने कहा कि जब सरकार अपने प्रमुख शिक्षा कार्यक्रम में ही पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध नहीं करा पा रही है, तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उसके दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘स्कूल्स ऑफ एमिनेंस’ वास्तव में पहले से मौजूद मॉडल स्कूलों को नया नाम देने से अधिक कुछ नहीं हैं।
सरकारी स्कूलों से छात्रों का मोहभंग?
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष ने सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या में आई गिरावट को भी सरकार की शिक्षा नीति पर सवाल उठाने वाला आंकड़ा बताया। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या में करीब 1.54 लाख की कमी आई है, जबकि इसी अवधि में निजी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या लगभग 82,000 बढ़ी है।
वड़िंग ने कहा कि यह स्थिति संकेत देती है कि अभिभावकों का सरकारी स्कूलों से भरोसा कम हो रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव के दावे कर रही है, लेकिन जमीन पर तस्वीर इसके विपरीत नजर आ रही है।
फर्जी छात्र प्रविष्टियों का भी उठाया मुद्दा
वड़िंग ने 2025 में चलाए गए सत्यापन अभियान का हवाला देते हुए कहा कि इस दौरान करीब 70,000 फर्जी छात्र प्रविष्टियां सामने आई थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन फर्जी प्रविष्टियों के माध्यम से मिड-डे मील और छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं के लिए आवंटित सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका पैदा होती है।
उन्होंने कहा कि राज्य के कई सरकारी स्कूलों में आज भी पर्याप्त बुनियादी ढांचा, सुविधाएं और आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं हैं। इसका सीधा असर विद्यार्थियों के पढ़ाई के माहौल और शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ रहा है।
वड़िंग ने कहा कि सरकार को प्रचार और दावों के बजाय स्कूलों की वास्तविक समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए तथा खाली पदों को भरने के साथ-साथ विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए।