जयपुर 2 जनवरी (दैनिक खबरनामा )राजस्थान विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा लगातार छात्रसंघ चुनावों को टाले जाने को लेकर छात्रों और शिक्षाविदों के बीच असंतोष बढ़ता जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन का तर्क है कि छात्रसंघ चुनावों से शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं और शिक्षा व्यवस्था में बाधा उत्पन्न होती है। हालांकि, इस दलील पर अब सवाल उठने लगे हैं।छात्रों का कहना है कि जब छात्रसंघ चुनाव नहीं हो रहे हैं, तब भी विश्वविद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह सुचारु नहीं है। आज भी शैक्षणिक अव्यवस्थाएं, संसाधनों की भारी कमी, कक्षाओं का नियमित संचालन न होना,पुस्तकालय और प्रयोगशालाओं की सीमित सुविधाएं तथा छात्रों से जुड़ी अनेक समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। ऐसे में चुनावों को शिक्षा में बाधा बताना तर्कसंगत प्रतीत नहीं होता।छात्र संगठनों और छात्र प्रतिनिधियों का मानना है कि छात्रसंघ केवल चुनाव तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे छात्रों और प्रशासन के बीच एक सेतु का कार्य करते हैं। छात्रसंघ के माध्यम से छात्रों की समस्याएं, सुझाव और मांगें प्रशासन तक पहुंचती हैं, जिससे समाधान की प्रक्रिया तेज होती है। चुनावों को टालकर छात्रों की लोकतांत्रिक आवाज को कमजोर किया जा रहा है शिक्षाविदों का भी कहना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया शिक्षा व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा है। छात्रसंघ चुनाव छात्रों में नेतृत्व क्षमता, जिम्मेदारी और सामाजिक चेतना का विकास करते हैं। इन्हें बाधा बताकर लगातार स्थगित करना न केवल छात्रों के अधिकारों का हनन है, बल्कि विश्वविद्यालय की लोकतांत्रिक परंपराओं को भी कमजोर करता है।इस बीच छात्रों ने मांग की है कि विश्वविद्यालय प्रशासन जल्द से जल्द छात्रसंघ चुनावों की तिथि घोषित करे और पारदर्शी एवं शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव संपन्न कराए। उनका कहना है कि छात्रों की भागीदारी और संवाद के बिना शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार संभव नहीं है।लगातार टाले जा रहे छात्रसंघ चुनावों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या वास्तव में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है, या फिर छात्रों की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। अब देखना होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस बढ़ते असंतोष पर क्या रुख अपनाता है।