दैनिक खबरनामा। श्रीनगर, 10 जुलाई: मुत्ताहिदा मजलिस-ए-उलेमा के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के दिल्ली आंदोलन का समर्थन किया, मगर साथ में कड़ी शर्त भी जोड़ दी। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष को केवल राज्य का दर्जा बहाल करने तक सीमित नहीं रखा जा सकता।
शुक्रवार को श्रीनगर की ऐतिहासिक जामा मस्जिद में जुमे के खुतबे के दौरान मीरवाइज ने यह बात कही। उन्होंने बताया कि उन्हें डॉ. फारूक अब्दुल्ला की ओर से 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन का न्योता मिला है। मीरवाइज के अनुसार लोगों के अधिकारों की वापसी के लिए हर सच्ची और सामूहिक कोशिश आज बेहद जरूरी है।
अधिकारों की संपूर्ण बहाली हो लक्ष्य
मीरवाइज ने कहा कि 5 अगस्त 2019 के बाद जम्मू-कश्मीर से जो संवैधानिक संरक्षण हटाए गए, उसके कारण यहां के लोग अपने बुनियादी अधिकारों से वंचित हो गए हैं। ऐसे में किसी भी राजनीतिक लड़ाई का मकसद सिर्फ प्रशासनिक स्तर में बदलाव नहीं होना चाहिए, बल्कि 2019 से पूर्व की संवैधानिक और सियासी हैसियत को पूरी तरह वापस लाना होना चाहिए।
मीरवाइज ने गिनाईं 3 प्रमुख मांगें
370 और 35A सहित सभी अधिकार बहाल हों: उन्होंने जोर देकर कहा कि आंदोलन के एजेंडे में अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35A समेत वो सभी संवैधानिक प्रावधान शामिल किए जाएं जो 2019 में वापस लिए गए थे।
एनसी को अपने वादे की याद: मीरवाइज ने नेशनल कॉन्फ्रेंस को उसके चुनावी घोषणा पत्र की याद दिलाई। उनका कहना था कि जनता ने एनसी को इसी भरोसे पर वोट दिया था कि पार्टी 2019 से पहले वाली स्थिति को फिर से स्थापित करेगी। सत्ता में रहने के नाते अब उस जिम्मेदारी को निभाने की बारी एनसी की है।
राजनीतिक कैदियों की रिहाई: उन्होंने मांग की कि प्रदर्शन में उन राजनीतिक बंदियों और लंबे समय से हिरासत में रखे गए कश्मीरी नौजवानों की रिहाई का मुद्दा भी उठाया जाए।
लक्ष्य है सम्मान के साथ स्थायी शांति
मीरवाइज ने अंत में कहा कि इस पूरी मुहिम का अंतिम उद्देश्य कश्मीर मसले का न्यायसंगत हल और सम्मानजनक शांति की स्थापना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आधा-अधूरा एजेंडा उन्हें मंजूर नहीं है। आंदोलन ऐसा होना चाहिए जो जम्मू-कश्मीर के लोगों को 2019 से पहले मिले सभी अधिकार वापस दिला सके।