दैनिक खबरनामा। चंडीगढ़, 11 जुलाई: शहर में प्रदूषण घटाने के मकसद से सड़कों पर उतारी गईं इलेक्ट्रिक बसों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। शनिवार सुबह सेक्टर-46 और 47 के बीच दौड़ रही एक इलेक्ट्रिक बस के पिछले दोनों टायर अचानक निकल गए। उस वक्त बस में करीब 15 लोग सवार थे।
घटना के समय बस रामदरबार से मलोया की तरफ जा रही थी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक बस सामान्य गति से चल रही थी तभी पीछे से तेज आवाज आई और दोनों पहिए अलग हो गए।
ड्राइवर की सतर्कता से बची जान
इस मुश्किल घड़ी में बस चालक ने घबराहट नहीं दिखाई। उसने फौरन ब्रेक लगाकर वाहन को नियंत्रित किया और सड़क के किनारे सुरक्षित रोक दिया। अगर बस की रफ्तार तेज होती या चालक समय पर प्रतिक्रिया न देता तो स्थिति गंभीर हो सकती थी। गनीमत रही कि इस हादसे में कोई भी यात्री घायल नहीं हुआ।
पहले भी हो चुकी हैं तकनीकी गड़बड़ियां
यह पहला मौका नहीं है जब शहर की इलेक्ट्रिक बसें चर्चा में आई हों। इससे पहले भी कई बसों के पलटने और तकनीकी खराबी की शिकायतें सामने आ चुकी हैं।
इसी हफ्ते यूटी प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने चंडीगढ़ सचिवालय में वरिष्ठ अफसरों के साथ बैठक कर शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की समीक्षा की थी। उस बैठक में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाने, मौजूदा बेड़े को दुरुस्त करने और यात्रियों को ज्यादा भरोसेमंद व सुरक्षित सफर देने पर बात हुई थी।
अधिकारियों ने प्रशासक को जानकारी दी कि आने वाले दिनों में नई इलेक्ट्रिक बसों को चरणबद्ध तरीके से बेड़े में जोड़ा जाएगा। लेकिन शनिवार को घटी घटना के बाद इस पूरी योजना पर सवाल उठने लगे हैं।
रखरखाव पर जोर देने की मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि सिर्फ नई बसें खरीदना काफी नहीं है। उनकी गुणवत्ता, नियमित फिटनेस टेस्ट, तकनीकी जांच और समय-समय पर मेंटेनेंस पर भी ध्यान देना जरूरी है। उनका मानना है कि अगर सुरक्षा के मानकों को सख्ती से नहीं अपनाया गया तो सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने की मुहिम पर असर पड़ सकता है।