दैनिक खबरनामा। चंडीगढ़, 5 अगस्त: युवाओं से नशामुक्त भारत के अग्रदूत बनने का आह्वान करते हुए आर्य युवा समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री योगी सूरी ने कहा कि वे “स्वामी दयानंद सरस्वती की तलवार बनकर नशे रूपी दानव का संहार करें।” यह प्रेरक उद्बोधन उन्होंने मेहर चंद महाजन डीएवी महिला महाविद्यालय में आयोजित ‘नो नशा नेशन’ कार्यक्रम में अपने संबोधन में किया। यह कार्यक्रम आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) तथा विक्ट्री अगेंस्ट ड्रग एब्यूज (वाडा) क्लब के तत्वावधान में इंडक्शन वीक 2026 के अंतर्गत आयोजित किया गया।

कार्यक्रम का उद्देश्य नवप्रवेशी छात्राओं को बढ़ती नशे की समस्या के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें मूल्यपरक, अनुशासित और सामाजिक उत्तरदायित्व से युक्त जीवन अपनाने के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम में श्री योगी सूरी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, चंडीगढ़ के जोनल निदेशक श्री अमनजीत सिंह, आईआरएस विशिष्ट अतिथि रहे। इस अवसर पर कॉलेज की पूर्व छात्रा एवं सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती प्रिया सूरी, श्री नरेश नैय्यर, श्रीमती सुमन नैय्यर, डीएवी कॉलेज प्रबंध समिति, नई दिल्ली के वरिष्ठ सदस्य श्री आर. सी. जीवन तथा डीएवी कॉलेज प्रबंध समिति के राष्ट्रीय समन्वयक (कॉलेज) डॉ. अनूप कुमार वत्स विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे।
अपने मुख्य उद्बोधन में श्री योगी सूरी ने एमसीएम को उच्च शिक्षा का प्रतिष्ठित केंद्र बताते हुए नवप्रवेशी छात्राओं को इस संस्थान का हिस्सा बनने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि सच्ची स्वतंत्रता अपने जीवन की बागडोर स्वयं संभालने और विवेकपूर्ण निर्णय लेने में निहित है। उन्होंने चेतावनी दी कि मादक पदार्थों की लत और डिजिटल निर्भरता आज की पीढ़ी से उसका सबसे मूल्यवान संसाधन समय छीन रही है। स्वामी दयानंद सरस्वती के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने युवाओं से दोनों प्रकार के व्यसनों का साहसपूर्वक सामना करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार विषैले सर्प से बचने का सबसे सुरक्षित उपाय उससे दूर रहना है, उसी प्रकार नशे से बचने का सबसे प्रभावी मार्ग पूर्ण परहेज है। ‘ब्रोकन विंडो थ्योरी’ की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जब समाज और जीवन दांव पर हों तो निष्क्रिय रहना विकल्प नहीं हो सकता; प्रत्येक व्यक्ति को जिम्मेदारी लेकर निर्णायक कदम उठाने होंगे।

उन्होंने युवाओं से हर प्रकार के नशे के विरुद्ध उसी संकल्प के साथ संघर्ष करने का आह्वान किया, जिस भावना से भारत के स्वतंत्रता सेनानियों ने देश की आज़ादी के लिए लड़ाई लड़ी थी। उन्होंने कहा कि नशे पर विजय का वास्तविक बल संस्कारों, आत्मानुशासन और वेदों की शाश्वत ज्ञानधारा से प्राप्त होता है। छात्राओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वे स्वामी दयानंद सरस्वती की वह तलवार बनें जो नशे रूपी दानव का संहार करे। उन्होंने यह भी कहा कि सशक्त और मूल्यनिष्ठ महिलाएँ ही मजबूत परिवार, सुदृढ़ विचारधारा और अंततः शक्तिशाली राष्ट्र का निर्माण करती हैं। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने सभी को ‘नो नशा नेशन’ शपथ दिलाई और नशामुक्त भारत के निर्माण का संकल्प दोहराया। आर्य युवा समाज द्वारा प्रस्तुत प्रेरक वीडियो ने भी नशामुक्त समाज के संदेश को प्रभावी ढंग से विद्यार्थियों तक पहुँचाया।
विशिष्ट अतिथि श्री अमनजीत सिंह ने कहा कि नशे की समस्या अत्यंत गंभीर चुनौती है। उन्होंने नशे से जुड़े कई भ्रमों—जैसे “एक बार प्रयोग करने से कुछ नहीं होता”, “नशा तनाव दूर करता है”, “यह केवल व्यक्तिगत पसंद है”, “इससे मुक्ति संभव नहीं”, “नशा केवल गरीबों को प्रभावित करता है” अथवा “प्रिस्क्रिप्शन दवाएँ हमेशा सुरक्षित होती हैं”—का खंडन किया। उन्होंने छात्राओं को टेली मानस हेल्पलाइन की जानकारी दी और उन्हें नशामुक्त भारत के दूत बनने के लिए प्रेरित किया।
डॉ. अनूप कुमार वत्स ने नवप्रवेशी छात्राओं का स्वागत करते हुए कहा कि इंडक्शन कार्यक्रम विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के वातावरण में सहज रूप से समायोजित होने में सहायता प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि श्री योगी सूरी द्वारा प्रारंभ किया गया ‘नो नशा नेशन’ अभियान आज राष्ट्रीय जनआंदोलन का रूप ले चुका है और विद्यार्थियों को इसमें सक्रिय योगदान देना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान पंजाब विश्वविद्यालय के मेधावी विद्यार्थियों को आईक्यूएसी छात्रवृत्तियाँ प्रदान कर सम्मानित किया गया, तथा नशे के दुष्परिणामों पर आधारित एक प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक भी प्रस्तुत किया गया।
कार्यवाहक प्राचार्या श्रीमती नीना शर्मा ने कहा कि यह कार्यक्रम कॉलेज के समग्र शिक्षा दृष्टिकोण का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों में जिम्मेदार नागरिकता, नैतिक मूल्यों और सामाजिक चेतना का विकास करना है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी पहलें नवप्रवेशी छात्राओं को सही जीवन-निर्णय लेने और राष्ट्र निर्माण में सार्थक योगदान देने के लिए प्रेरित करती हैं।