दैनिक खबरनामा। चंडीगढ़, 21 अगस्त: समुद्री जहाज पर नौकरी लगवाने का झांसा देकर चंडीगढ़ के एक मरीन इंजीनियर से साढ़े तीन लाख से ज्यादा रुपये ऐंठने और उसे आधा साल तक विदेश में फंसाए रखने का मामला सामने आया है। पीड़ित को एक दिन भी जहाज पर काम नहीं मिला। उपभोक्ता आयोग ने सेवा में घोर लापरवाही मानते हुए मुंबई की दो फर्मों पर तीन लाख रुपये का हर्जाना ठोका है।
दोषी करार दी गई कंपनियां हैं – गुड रिजल्ट मरीन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड और अल्माइटी मैरिटाइम सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड।
विज्ञापन देखकर हुआ संपर्क
शिकायतकर्ता के अनुसार सितंबर 2019 में उन्होंने अखबार में छपे एक विज्ञापन को देखकर गुड रिजल्ट मरीन सर्विसेज से बात की। कंपनी ने तुरंत जहाज पर नौकरी दिलाने का भरोसा दिया और इसके एवज में 3.70 लाख रुपये ले लिए।
योजना के मुताबिक इंजीनियर को चेन्नई से वियतनाम भेजा गया। वहां एयरपोर्ट पर कंपनी के प्रतिनिधि कृष्णा माधव झा ने अगवानी की और सीधे एक होटल ले जाया गया। होटल में पहुंचते ही उनका पासपोर्ट और अन्य जरूरी कागज जमा कर लिए गए। साथ ही उनसे 3000 अमेरिकी डॉलर अतिरिक्त भी वसूल किए गए।
हॉस्टल में धकेला, जहाज का इंतजार ही होता रहा
अगले दिन जहाज पर ले जाने के बजाय उन्हें एक मकाननुमा हॉस्टल में शिफ्ट कर दिया गया। वहां जाकर पता चला कि वह अकेले नहीं थे। 30 से 40 अन्य नाविक भी इसी तरह नौकरी के वादे पर लाए गए थे। सभी को 3-4 कमरों में ठूंसकर रखा गया था। कुछ लोग एक दिन से तो कुछ 16 महीने तक वहां फंसे हुए थे।
पीड़ित ने बताया कि वहां हालात बेहद खराब थे। कई बार समय पर खाना नहीं मिलता था और भूखे रहना पड़ता था।
परिवार को दिए जाते रहे झूठे आश्वासन
परिवार को जब सच्चाई पता चली तो पिता ने कंपनी से संपर्क किया। हर बार जवाब मिलता कि जहाज एक हफ्ते में आ जाएगा। जब वह निकल जाता तो कहा जाता 10 दिन में दस्तावेज बन जाएंगे। इस तरह दो महीने बीत गए।
दिसंबर 2019 में पिता ने मुंबई में पुलिस में शिकायत की धमकी दी। इसके बाद भी कंपनी ने सिर्फ नए वादे किए। इसी बीच कोरोना महामारी शुरू हो गई और शुभम किसी तरह वापस भारत लौट आए।
भारत आने के बाद उन्होंने उपभोक्ता आयोग में मामला दायर किया। आयोग ने सुनवाई के बाद दोनों कंपनियों को दोषी मानते हुए तीन लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।