दैनिक खबरनामा | 7 अगस्त | तेहरान: ईरान और अमेरिका के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर तनाव एक बार फिर गहराता दिखाई दे रहा है। हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच तनाव कम होने और इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को सामान्य आवाजाही के लिए खोलने की उम्मीद बनी थी, लेकिन ईरान की ओर से सामने आए नए प्रस्ताव ने वैश्विक बाजारों में एक बार फिर बेचैनी बढ़ा दी है।
समाचार एजेंसी फार्स के मुताबिक, ईरान की एक संसदीय समिति फिलहाल एक प्रारंभिक विधेयक पर विचार कर रही है। इस प्रस्ताव में अमेरिका, इजरायल और अन्य “दुश्मन देशों” के जहाजों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने पर प्रतिबंध लगाने का प्रावधान शामिल है। प्रस्तावित नियमों का उल्लंघन करने वाले जहाजों पर उनकी कीमत का 20 प्रतिशत तक जुर्माना लगाए जाने की बात कही गई है।
हालांकि, यह विधेयक अभी शुरुआती चरण में है और इसे ईरान की ओर से अंतिम मंजूरी नहीं मिली है। विशेषज्ञ फिलहाल प्रस्ताव की समीक्षा कर रहे हैं। समीक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसे संसद के समक्ष मंजूरी के लिए पेश किए जाने की संभावना है।
तेल की कीमतों में फिर उछाल
ईरान के इस संभावित कदम का असर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। शुक्रवार सुबह ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 1.30 प्रतिशत बढ़कर 84 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई। इससे पहले क्षेत्रीय तनाव में कमी की उम्मीद के चलते ब्रेंट की कीमत 94 डॉलर प्रति बैरल से गिरकर लगभग 80 डॉलर तक आ गई थी।
इसी तरह WTI क्रूड ऑयल में भी करीब 1 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और इसकी कीमत बढ़कर 78.03 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ईरान के प्रस्तावित प्रतिबंध के बाद अमेरिका की ओर से कोई जवाबी कदम उठाया जाता है, तो वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता और बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति में कच्चे तेल की कीमतों पर दोबारा तेज दबाव देखने को मिल सकता है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर अमेरिका की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
दुनियाभर के शेयर बाजारों पर दबाव
होर्मुज को लेकर बढ़ती अनिश्चितता का असर इक्विटी मार्केट पर भी पड़ा है। अमेरिकी शेयर बाजारों में करीब 1 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। भारत के शेयर बाजार भी दबाव में रहे और प्रमुख सूचकांकों में कमजोरी देखने को मिली।
एशियाई बाजारों में भी निवेशकों की चिंता साफ नजर आई। दक्षिण कोरिया और जापान के प्रमुख शेयर सूचकांक करीब 1 प्रतिशत तक नीचे आ गए।
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की सैन्य या राजनीतिक अस्थिरता का असर सिर्फ क्षेत्रीय स्तर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कच्चे तेल की कीमतों से लेकर दुनियाभर के शेयर बाजारों तक दिखाई दे सकता है।