दैनिक खबरनामा | नई दिल्ली, 1 जून : भारत और ओमान के बीच आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने वाला व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) आज से औपचारिक रूप से लागू हो गया है। इस महत्वपूर्ण समझौते के प्रभावी होने के साथ ही दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और सेवा क्षेत्र में सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
केंद्र सरकार ने इस समझौते को भारतीय उद्योगों और निर्यातकों के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया है। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे भारतीय उत्पादों को ओमान के बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी पहुंच मिलेगी और कई क्षेत्रों में निर्यात बढ़ने की संभावनाएं मजबूत होंगी।
व्यापारिक रिश्तों को मिलेगा नया विस्तार
भारत और ओमान लंबे समय से मजबूत व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंध साझा करते रहे हैं। हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। नवीनतम आंकड़े बताते हैं कि द्विपक्षीय व्यापार का आकार लगातार बढ़ रहा है, जिससे दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच बढ़ती साझेदारी का संकेत मिलता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नए समझौते के लागू होने के बाद यह व्यापारिक सहयोग और अधिक व्यापक रूप ले सकता है।
कई क्षेत्रों को मिलेगा सीधा लाभ
सीईपीए के तहत भारतीय वस्त्र उद्योग, कृषि उत्पाद, समुद्री खाद्य पदार्थ, ऑटोमोबाइल क्षेत्र, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग उत्पाद, दवा उद्योग, रसायन, इलेक्ट्रॉनिक्स और प्लास्टिक उत्पादों को विशेष लाभ मिलने की संभावना है।
व्यापारिक समुदाय का मानना है कि शुल्क संबंधी रियायतों और प्रक्रियागत सरलता से भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी, जिससे वे ओमान और खाड़ी क्षेत्र के अन्य बाजारों में अपनी उपस्थिति मजबूत कर सकेंगी।
खाड़ी बाजारों तक पहुंच का मजबूत माध्यम
ओमान को खाड़ी क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र माना जाता है। वहां की आधुनिक बंदरगाह सुविधाएं और रणनीतिक भौगोलिक स्थिति भारतीय कंपनियों को व्यापक क्षेत्रीय बाजारों तक पहुंचने में सहायता प्रदान कर सकती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए केवल ओमान तक सीमित अवसर नहीं लाएगा, बल्कि खाड़ी क्षेत्र के अन्य देशों में व्यापार विस्तार का मार्ग भी प्रशस्त करेगा।
समझिए, क्यों खास है सीईपीए
सामान्य मुक्त व्यापार समझौते की तुलना में व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता कहीं अधिक विस्तृत माना जाता है। जहां पारंपरिक समझौते मुख्य रूप से वस्तुओं के आयात-निर्यात शुल्क में रियायतों तक सीमित रहते हैं, वहीं सीईपीए में सेवाओं, निवेश, पेशेवरों की आवाजाही, नियामकीय सहयोग और व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने जैसे कई महत्वपूर्ण पहलू शामिल होते हैं।
यही कारण है कि इसे केवल व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि दो देशों की अर्थव्यवस्थाओं को गहराई से जोड़ने वाला व्यापक ढांचा माना जाता है।
पहले दिन से दिखने लगे सकारात्मक संकेत
व्यापार जगत के सूत्रों के अनुसार, समझौते के प्रभावी होते ही विभिन्न भारतीय बंदरगाहों से कई श्रेणियों के निर्यात उत्पादों की खेपें ओमान के लिए रवाना की गई हैं। उद्योग जगत को उम्मीद है कि आने वाले महीनों में निर्यात गतिविधियों में और तेजी देखने को मिलेगी।
भारतीय अर्थव्यवस्था को मिल सकती है नई ताकत
विश्लेषकों का मानना है कि यह समझौता भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल निर्यात को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि निवेश, रोजगार और औद्योगिक विकास के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
भारत और ओमान के बीच लागू हुआ यह नया आर्थिक समझौता दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को नई दिशा देने के साथ-साथ भारतीय उद्योगों के लिए वैश्विक बाजारों में विस्तार का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है