दैनिक खबरनामा ब्यूरो| जिनेवा, 2 जून: वैश्विक मौसम प्रणाली में बड़े बदलाव के संकेतों के बीच संयुक्त राष्ट्र और मौसम वैज्ञानिकों ने एक संभावित शक्तिशाली ‘अल नीनो’ घटना को लेकर चिंता जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में प्रशांत महासागर में विकसित हो रही यह स्थिति दुनिया के कई हिस्सों में चरम मौसम, भीषण गर्मी, सूखा और बाढ़ जैसी घटनाओं को बढ़ावा दे सकती है।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के अनुसार, प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्सों में समुद्री सतह का तापमान लगातार बढ़ रहा है। हाल के महीनों में दर्ज किए गए आंकड़े बताते हैं कि महासागर में गर्म पानी का विस्तार तेजी से हो रहा है, जो एक मजबूत अल नीनो के विकसित होने का संकेत माना जाता है।
वैज्ञानिकों की निगाहें प्रशांत महासागर पर
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि वर्ष की शुरुआत में जहां समुद्री परिस्थितियां सामान्य थीं, वहीं कुछ ही महीनों में तापमान में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। उपग्रह आंकड़ों और समुद्री निगरानी उपकरणों से मिले संकेत बताते हैं कि समुद्र की गहराइयों में बड़ी मात्रा में गर्म पानी पूर्वी दिशा में बढ़ रहा है। आमतौर पर ऐसी स्थिति सतह के तापमान को बढ़ाने और वैश्विक मौसम चक्र को प्रभावित करने का कारण बनती है।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि समुद्री तापमान लंबे समय तक सामान्य स्तर से काफी अधिक बना रहता है, तो यह एक अत्यंत शक्तिशाली या तथाकथित ‘सुपर अल नीनो’ का रूप ले सकता है। इतिहास में ऐसी घटनाएं बहुत कम देखने को मिली हैं, लेकिन जब भी ऐसा हुआ है, इसके प्रभाव व्यापक रहे हैं।
क्या होता है अल नीनो..?
अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जो तब उत्पन्न होती है जब प्रशांत महासागर के उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में हवा और समुद्री धाराओं के पैटर्न में बदलाव आता है। इसके परिणामस्वरूप समुद्र की सतह का तापमान बढ़ जाता है, जिसका असर दुनिया भर के मौसम पर पड़ता है।
दुनिया के कई हिस्सों में बढ़ सकती हैं मुश्किलें
जलवायु वैज्ञानिकों का मानना है कि एक मजबूत अल नीनो दक्षिण अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक गर्म और शुष्क परिस्थितियां पैदा कर सकता है। इससे सूखे की स्थिति गंभीर हो सकती है और जंगलों में आग लगने की घटनाओं में बढ़ोतरी हो सकती है।
दूसरी ओर, कुछ क्षेत्रों में सामान्य से अधिक वर्षा होने के कारण बाढ़ और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा भी बढ़ सकता है। अफ्रीका के कुछ हिस्सों और एशिया के कई क्षेत्रों में कृषि उत्पादन पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
भारतीय मानसून पर भी पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों के अनुसार अल नीनो का प्रभाव भारतीय मानसून की गतिविधियों को भी प्रभावित कर सकता है। यदि यह घटना अधिक मजबूत होती है, तो मानसूनी बारिश में कमी आने की संभावना बढ़ सकती है, जिससे कृषि और जल संसाधनों पर दबाव पड़ सकता है।
वैश्विक तापमान में हो सकती है नई बढ़ोतरी
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने भी चेतावनी दी है कि यदि अल नीनो की स्थिति और मजबूत होती है, तो यह पहले से जारी वैश्विक तापवृद्धि को और तेज कर सकती है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इसके प्रभाव से वैश्विक औसत तापमान में अतिरिक्त वृद्धि दर्ज हो सकती है, जिससे आने वाले वर्षों में नए तापमान रिकॉर्ड बनने की संभावना बढ़ जाएगी।
जलवायु विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया पहले ही जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभावों का सामना कर रही है। ऐसे में एक शक्तिशाली अल नीनो मौसम संबंधी चुनौतियों को और जटिल बना सकता है, जिसके लिए देशों को पहले से तैयारी और सतर्कता बरतने की आवश्यकता होगी।