दैनिक खबरनामा | 7 अगस्त, मुंबई: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वित्तीय सेवा तथा बैंकिंग शेयरों में बिकवाली के दबाव के बीच भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार को सप्ताह के आखिरी कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर फिर बढ़ी अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने बाजार की चिंता बढ़ा दी। इससे मध्य पूर्व में संभावित शांति समझौते को लेकर भी निवेशकों की उम्मीदों पर असर पड़ा और प्रमुख घरेलू सूचकांक दबाव में रहे।
कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 455.59 अंक यानी 0.58 प्रतिशत फिसलकर 78,499.17 पर बंद हुआ। इसी तरह एनएसई निफ्टी 50 में 65.35 अंक यानी 0.27 प्रतिशत की गिरावट रही और यह 24,570.65 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में आई इस कमजोरी के चलते निवेशकों की संपत्ति में करीब 1.60 लाख करोड़ रुपये की कमी आई।
मिडकैप में तेजी, स्मॉलकैप में मामूली गिरावट
व्यापक बाजार की बात करें तो निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.22 प्रतिशत चढ़ा, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 0.05 प्रतिशत नीचे रहा।
सेक्टोरल इंडेक्स में निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सबसे ज्यादा दबाव में रहे। दूसरी ओर निफ्टी ऑटो और निफ्टी आईटी में सबसे अधिक मजबूती देखने को मिली। निफ्टी मेटल और निफ्टी पीएसयू बैंक भी बढ़त के साथ बंद हुए।
इन शेयरों में दिखी सबसे ज्यादा हलचल
निफ्टी50 के शेयरों में ग्रासिम इंडस्ट्रीज, टीसीएस, हिंडाल्को, एमएंडएम, एचसीएल टेक और एसबीआई सबसे ज्यादा बढ़ने वाले शेयरों में रहे।
इसके उलट बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, ट्रेंट, आईसीआईसीआई बैंक, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज और श्रीराम फाइनेंसमें सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई।
पश्चिम एशिया का तनाव बना बाजार की चिंता
मार्केट एक्सपर्ट सुनील शाह ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि शुक्रवार के कारोबार में प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स में कमजोरी की बड़ी वजह पश्चिम एशिया में दोबारा बढ़ा तनाव रहा। हालांकि, उनके मुताबिक बाजार में इसके अलावा किसी बड़े घटनाक्रम से जुड़ी खास हलचल नहीं दिखाई दी।
उन्होंने कहा कि फिलहाल कंपनियों के तिमाही नतीजों का दौर जारी है और बाजार प्रत्येक कंपनी के परिणाम के अनुसार प्रतिक्रिया दे रहा है। इसके साथ ही रातभर मिले संकेत भी नकारात्मक रहे और शुक्रवार को वैश्विक संकेत भी बाजार के लिए कमजोर थे।
कच्चे तेल की कीमतों पर नजर
सुनील शाह के मुताबिक मौजूदा परिस्थितियों के बावजूद बाजार का रुख धीरे-धीरे तेजी की तरफ बढ़ता दिखाई दे रहा है। उन्होंने इसकी एक प्रमुख वजह कच्चे तेल की कीमतों को बताया, जो फिलहाल करीब 80 डॉलर के आसपास हैं।
उनका कहना है कि अगर पश्चिम एशिया में शांति समझौता होता है तो कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आ सकती है। ऐसे में बाजार पर दबाव कम होने की संभावना है। इसी वजह से उन्हें लगता है कि बाजार फिलहाल पूरी तरह मंदी की ओर जाने के बजाय अपेक्षाकृत सहज स्थिति में है और उसमें तेजी की संभावनाएं बनी हुई हैं।