दैनिक खबरनामा। नई दिल्ली, 9 अगस्त: खगोल विज्ञान के शौकीनों के लिए बुधवार, 12 अगस्त 2026 यादगार रहने वाला है। इसी एक दिन आसमान में तीन बड़ी घटनाएं एक साथ घटेंगी। सुबह ग्रहों का दुर्लभ जमावड़ा, दिन में साल का सबसे बड़ा पूर्ण सूर्य ग्रहण और रात में पर्सिड उल्का वर्षा अपने शिखर पर होगी।
भारत में दिखेगा या नहीं
इस बार का पूर्ण सूर्य ग्रहण भारत से नहीं देखा जा सकेगा। वजह साफ है, ग्रहण के समय यहां रात होगी।
भारतीय समय के अनुसार ग्रहण 12 अगस्त की रात 9 बजकर 5 मिनट पर शुरू होगा। पूर्ण अवस्था रात 10 बजकर 29 मिनट से 11 बजकर 17 मिनट तक रहेगी। पूर्ण ग्रहण रात 12 बजकर 5 मिनट पर खत्म होगा और पूरी प्रक्रिया 13 अगस्त को 1 बजकर 29 मिनट पर पूरी होगी।
कहां दिखेगा पूर्ण और आंशिक ग्रहण
पूर्ण सूर्य ग्रहण का सीधा नजारा उत्तरी रूस, ग्रीनलैंड, आइसलैंड के साथ स्पेन और पुर्तगाल के कुछ इलाकों में मिलेगा। स्पेन के उत्तरी हिस्सों में कुछ देर के लिए दिन में ही अंधेरा जैसा माहौल बन सकता है।
आंशिक ग्रहण उत्तरी अमेरिका, कनाडा, उत्तर-पश्चिमी अफ्रीका और यूरोप के कई देशों में दिखाई देगा। कुछ जगहों पर चांद सूरज के 90 फीसदी से ज्यादा हिस्से को ढक देगा। अफ्रीका और यूरोप के कुछ हिस्सों में सूर्यास्त के वक्त ही ग्रहण लगेगा, यानी डूबता सूरज भी आंशिक ग्रहण की छाया में नजर आएगा।
12 अगस्त को और क्या खास
सूर्योदय से करीब 45 से 75 मिनट पहले आसमान में एक सीध में छह ग्रह नजर आएंगे। ये हैं बुध, मंगल, बृहस्पति, शनि, यूरेनस और नेपच्यून। इनमें मंगल, बृहस्पति और शनि को बिना दूरबीन के भी पहचाना जा सकेगा।
उसी रात अमावस्या होने के कारण आसमान बेहद साफ रहेगा। इसी वजह से पर्सिड उल्का वर्षा भी अपने चरम पर होगी। टूटते तारों की भरमार देखने के लिए परिस्थितियां सबसे बेहतर रहेंगी।
सूर्य ग्रहण होता क्या है
जब चांद अपनी परिक्रमा के दौरान पृथ्वी और सूरज के बीच आ जाता है तो वह सूरज की रोशनी को रोक देता है। इसे ही सूर्य ग्रहण कहा जाता है। अगर चांद सूरज को पूरी तरह ढक ले तो उसे पूर्ण सूर्य ग्रहण कहते हैं और अगर कुछ हिस्सा ही ढके तो आंशिक ग्रहण।
12 अगस्त की सुबह ग्रहों की परेड, दिन में कुछ देशों में दिन का अंधेरा और रात में उल्काओं की बरसात। तीनों नजारे एक ही तारीख पर, लेकिन भारत के दर्शकों को टीवी और लाइव स्ट्रीम के जरिए ही इनका आनंद लेना होगा।