दैनिक खबरनामा। चंडीगढ़, 9 अगस्त: चंडीगढ़ पुलिस के भीतर इन दिनों एक अनोखी दुविधा सामने है। शहर में थाने मौजूद हैं, पुलिस चौकियां भी काम कर रही हैं और जवानों की तैनाती भी है, पर कई जगहों पर मुखिया की कुर्सी अब भी खाली है। विभाग के लिए सबसे बड़ी परेशानी यही है कि इन पदों की जिम्मेदारी किसे सौंपी जाए। मौजूदा हालात में कुछ थानों और चौकियों का संचालन अतिरिक्त प्रभार के सहारे किया जा रहा है।
जिन अधिकारियों को थाना या चौकी सौंपे जाने पर विचार हो रहा है, उनके नामों पर विभाग के भीतर लगातार चर्चा चल रही है। लेकिन यहां अड़चन यह आ रही है कि कमान संभालने के लिए ऐसे चेहरे ढूंढना मुश्किल हो रहा है जिन पर कोई दाग न हो।
इस मुद्दे को लेकर वरिष्ठ अफसरों के बीच लंबे समय से बातचीत जारी है। यहां तक कि पुलिस में दशकों तक सेवा दे चुके एक सेवानिवृत्त डीएसपी से भी राय ली गई। मकसद साफ था, ऐसे अधिकारियों को आगे लाना जिनका रिकॉर्ड बेहतर हो और छवि निर्विवाद हो। इसके बावजूद अब तक खाली पड़े पदों का स्थायी हल नहीं निकल पाया है।
खाली पदों की वजह क्या है
महकमे में सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात पर है कि जिन अफसरों को इंचार्ज बनाया जा सकता था, उनके नाम के साथ किसी न किसी विवाद या विभागीय टिप्पणी जुड़ जाती है।
दूसरी ओर, जिनकी छवि अपेक्षाकृत साफ मानी जाती है, उनकी संख्या बहुत कम है। साथ ही उनमें से कई पहले से ही अहम जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। नतीजा यह है कि कुर्सियां तो खाली हैं, पर उन्हें भरने के लिए ‘बेदाग’ विकल्प कम पड़ रहे हैं।
दोहरी चुनौती के बीच नई तैनाती की तैयारी
पुलिस विभाग के सामने अब दो मोर्चे हैं। एक तरफ खाली थानों और चौकियों में जल्द से जल्द इंचार्ज तैनात करने हैं, दूसरी तरफ यह तय करना है कि नेतृत्व ऐसे अफसर के हाथ में जाए जिसकी ईमानदारी, नेतृत्व क्षमता और सेवा रिकॉर्ड पर सवाल न उठे।
अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में कई थानों और चौकियों में नई नियुक्तियां की जाएंगी, लेकिन उससे पहले ‘क्लीन इमेज’ की कसौटी पर खरे उतरने वाले नामों को अंतिम रूप देना जरूरी है।