दैनिक ख़बरनामा। नई दिल्ली, 9 अगस्त: सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान के बीच हाल में हुए संयुक्त रक्षा समझौते को लेकर सऊदी अरब और तुर्किये ने स्पष्ट किया है कि यह समझौता किसी विशेष देश के खिलाफ सैन्य गठजोड़ या सांप्रदायिक गुट बनाने की कोशिश नहीं है। सऊदी अधिकारियों ने यह भी कहा कि समझौते का किसी परमाणु महत्वाकांक्षा या हथियारों की होड़ से कोई संबंध नहीं है।
सऊदी विदेश मंत्रालय में सार्वजनिक कूटनीति के उप मंत्री राएद क्रिमली ने शुक्रवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि यह समझौता “सैन्य गठजोड़ या सांप्रदायिक गुट स्थापित करने का प्रयास नहीं है।” उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य दीर्घकालिक और टिकाऊ रक्षा क्षमताओं का निर्माण करना है।
क्रिमली ने कहा कि यह समझौता क्षेत्र के किसी भी देश की सुरक्षा के लिए खतरा नहीं है और न ही यह किसी दो देशों के बीच तनाव बढ़ाने की दिशा में उठाया गया कदम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका संबंध किसी परमाणु महत्वाकांक्षा या हथियारों की दौड़ से भी नहीं है।
तुर्किये ने भी किया समझौते का बचाव
तुर्किये ने भी शुक्रवार को कहा कि सऊदी अरब और पाकिस्तान के साथ किया गया संयुक्त रक्षा समझौता किसी विशेष देश को निशाना बनाकर नहीं किया गया है।
तुर्किये के राष्ट्रपति कार्यालय के संचार निदेशक बुरहानत्तीन दुरान ने ‘एक्स’ पर कहा कि ‘मक्का समझौता’ किसी खास देश के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि यह समझौता तीनों देशों की साझा सुरक्षा और सामूहिक प्रतिरोध क्षमता को मजबूत करेगा तथा क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच बढ़ी सुरक्षा साझेदारी
सऊदी अरब ने अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध की पृष्ठभूमि में अपनी सुरक्षा साझेदारियों को मजबूत करने पर जोर दिया है। इस संघर्ष का असर आसपास के देशों पर भी पड़ा है और होर्मुज जलडमरूमध्य तथा लाल सागर में समुद्री परिवहन प्रभावित हुआ है।
इस युद्ध के बीच ईरान और यमन में उसके सहयोगी हूती विद्रोही अधिक सक्रिय हुए हैं। दोनों पर सऊदी अरब को निशाना बनाकर हमले करने के आरोप लगे हैं। वहीं, विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा घटनाक्रम के बाद अमेरिका को लेकर सऊदी अरब में एक भरोसेमंद सुरक्षा साझेदार के रूप में कुछ सवाल उठे हैं।
किसी एक सदस्य पर हमला, सभी पर हमला माना जाएगा
सऊदी प्रेस एजेंसी और पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी संयुक्त बयान के अनुसार, तीनों देशों ने ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौते’ पर हस्ताक्षर किए हैं। समझौते में क्षेत्र और उससे बाहर शांति, सुरक्षा एवं स्थिरता को बढ़ावा देने के साथ-साथ सामूहिक सुरक्षा को मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता जताई गई है।
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि समझौते के तहत किसी एक सदस्य पर हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। मंत्रालय ने इसे सामूहिक प्रतिरोध क्षमता को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया समझौता बताया।
ईरान को लेकर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा समझौता
क्षेत्रीय युद्ध शुरू होने के बाद सऊदी अरब के तुर्किये, मिस्र और पाकिस्तान के साथ संबंधों में नजदीकी बढ़ी है। ये देश संघर्ष के समाधान और मध्यस्थता के प्रयासों पर जोर देते रहे हैं।
भारत का रूख क्या होगा इस समझौते को लेकर
वहीं पाकिस्तान का मानना है इस डील से किसी एक देश पर हमला तीनो देशों पर हमला मानना जाएगा, तीनो देशों में पाकिस्तान ही ऐसा देश है जो की बड़ी सैन्य ताक़त रखता है और एक परमाणु संपन्न देश भी है वही अब देखने वाली बात है की भारत इस डील को किस नजरिये से देखता है क्यों की भारत की सऊदी के साथ अच्छे तालुकात है और पिछले कई सालों में वे और गहरे हुए है।