दैनिक खबरनामा | 10 अगस्त | नई दिल्ली: पहलगाम आतंकी हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के ऊंचाई वाले और बर्फ से ढके इलाकों में आतंकवाद विरोधी अभियानों में तैनात केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवानों की सुरक्षा और ऑपरेशनल क्षमता बढ़ाने की तैयारी की गई है। गृह मंत्रालय ने करीब 600 जवानों के लिए 4.54 करोड़ रुपये से अधिक के विशेष विंटर गियर की खरीद को मंजूरी दी है।
प्रस्तावित उपकरणों में स्नो बूट, गेटर्स, स्लीपिंग बैग, स्नो गॉगल्स, इंसुलेटिंग मैट, रक्सैक, दस्ताने, टेंट, थर्मल इनसोल, कंबल और रेस्क्यू बैग शामिल हैं। इसके साथ ही जवानों को डीआरडीओ द्वारा विकसित ‘हिमसुरक्षा’ कपड़े भी उपलब्ध कराए जाएंगे, जिन्हें अत्यधिक ठंडे मौसम में इस्तेमाल के लिए तैयार किया गया है।
-50 डिग्री तक के तापमान में सुरक्षा में मदद
अधिकारियों के मुताबिक, नए कपड़े और उपकरण बेहद कम तापमान, भारी बर्फबारी और कठिन पहाड़ी इलाकों में जवानों को बेहतर सुरक्षा प्रदान करेंगे। इनका इस्तेमाल लंबे समय तक चलने वाली गश्त, निगरानी, तलाशी और आतंकवाद विरोधी अभियानों के दौरान किया जाएगा।
सुरक्षा एजेंसियों के सामने एक बड़ी चुनौती यह भी है कि आतंकी ऊंचाई वाले बर्फीले क्षेत्रों को छिपने और आवाजाही के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। इसे देखते हुए सुरक्षा बलों ने ऐसे इलाकों में अपनी मौजूदगी बढ़ाई है। 6,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर अस्थायी ऑपरेटिंग बेस बनाए गए हैं, जहां CRPF के कमांडो तैनात किए जाते हैं।
जम्मू-कश्मीर में 55 अस्थायी ऑपरेटिंग बेस
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, CRPF अब तक जम्मू-कश्मीर के दोनों संभागों में 55 अस्थायी ऑपरेटिंग बेस स्थापित कर चुका है। प्रत्येक बेस पर सामान्य तौर पर 15 से 25 सशस्त्र जवान तैनात रहते हैं। इन केंद्रों पर जवानों के रहने, आराम करने और ऑपरेशन के बाद पुनर्स्थापन के लिए जरूरी सुविधाएं भी मुहैया कराई जाती हैं।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद इन ऑपरेटिंग बेस के नेटवर्क को और मजबूत करने का काम तेज किया गया। CRPF ने इस तरह का अपना पहला ऑपरेशनल बेस जुलाई 2025 में स्थापित किया था। हालांकि, सेना की तर्ज पर ऊंचाई वाले इलाकों में ऐसे बेस विकसित करने की योजना 2022-23 से ही विचाराधीन थी।
22 अप्रैल 2025 के हमले के बाद बदली रणनीति
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम की बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। इस घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने जम्मू-कश्मीर के ऊंचाई वाले इलाकों में आतंकियों के संभावित ठिकानों और उनकी आवाजाही के मार्गों पर निगरानी बढ़ाने की रणनीति तैयार की।
इसी रणनीति के तहत अस्थायी ऑपरेटिंग बेस को सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा बनाया गया। इन बेस के जरिए दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में जवानों की लंबे समय तक तैनाती संभव हो रही है। साथ ही संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर तलाशी अभियान शुरू करने में भी मदद मिलती है।
दो साल तक इस्तेमाल किए जा सकेंगे अधिकांश उपकरण
गृह मंत्रालय से विंटर गियर की खरीद को मंजूरी मिलने के बाद ऊंचाई वाले ऑपरेटिंग बेस में तैनात जवानों को पहले की तुलना में बेहतर लॉजिस्टिक सपोर्ट मिलने की उम्मीद है। अधिकारियों के अनुसार, खरीदे जाने वाले अधिकांश उपकरणों की औसत उपयोग अवधि करीब दो वर्ष होगी।
सरकार का यह कदम अत्यधिक ठंड और बर्फीले पहाड़ी क्षेत्रों में तैनात CRPF जवानों की सुरक्षा, गतिशीलता और ऑपरेशनल क्षमता मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कठिन मौसम और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद जवान लंबे समय तक आतंकवाद विरोधी अभियानों को प्रभावी ढंग से जारी रख सकें।