दैनिक खबरनामा | चंडीगढ़, 10 अगस्त 2026. पंजाब में व्यापार और उद्योग के लिए कारोबारी माहौल को और सरल बनाने की दिशा में भगवंत मान सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पंजाब विधानसभा ने सोमवार को पंजाब वस्तु एवं सेवा कर संशोधन विधेयक-2026 को पारित कर दिया। वित्त एवं आबकारी तथा कर मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा द्वारा सदन में पेश किए गए इस विधेयक का उद्देश्य कर संबंधी प्रक्रियाओं को आसान बनाना, स्व-अनुपालन को बढ़ावा देना और अनावश्यक मुकदमेबाजी को कम करना है।
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पीजीएसटी प्रावधानों में किए गए संशोधन व्यापार और उद्योग को प्रक्रियागत बाधाओं से राहत देने के साथ-साथ कार्यशील पूंजी की उपलब्धता और तरलता में सुधार करने में मदद करेंगे। इससे करदाताओं पर अनुपालन का बोझ भी कम होगा और राज्य में कारोबार के लिए अधिक अनुकूल वातावरण तैयार होगा।
संशोधन के तहत धारा 15 और 34 में बदलाव किए गए हैं। अब आपूर्तिकर्ता और प्राप्तकर्ता के बीच पहले से किसी समझौते की अनिवार्यता के बिना क्रेडिट नोट जारी करके बिक्री के बाद दी गई छूट को आपूर्ति के मूल्य से बाहर किया जा सकेगा। इसके अलावा, किसी भी व्यावसायिक कारण से दी गई बिक्री के बाद की छूट के लिए भी क्रेडिट नोट जारी करने की अनुमति होगी। इससे कारोबारियों को व्यावसायिक छूटों के समायोजन में अधिक सुविधा मिलेगी।
विधेयक में धारा 54 के तहत भी महत्वपूर्ण राहत का प्रावधान किया गया है। इनवर्टेड ड्यूटी ढांचे वाले मामलों में इनपुट टैक्स क्रेडिट के 90 प्रतिशत अंतरिम रिफंड का लाभ बढ़ाया गया है। इससे ऐसे कारोबारियों की कार्यशील पूंजी की स्थिति बेहतर होने की उम्मीद है।
इसके साथ ही वस्तुओं के निर्यात पर चुकाए गए एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर के रिफंड के लिए पहले लागू 1,000 रुपये की न्यूनतम सीमा को भी हटा दिया गया है। अब 1,000 रुपये से कम की रिफंड राशि होने पर भी पात्र निर्यातकों को रिफंड मिल सकेगा।
हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि सरकार द्वारा किए गए ये बदलाव राज्य के व्यापारिक समुदाय की व्यावहारिक जरूरतों को ध्यान में रखकर किए गए हैं। इनसे करदाताओं को वित्तीय राहत मिलने के साथ-साथ अनुपालन प्रक्रिया सरल होगी और मुकदमेबाजी में कमी आएगी।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य पंजाब में ऐसा कारोबार अनुकूल वातावरण तैयार करना है, जहां उद्यमियों और उद्योगों को अनावश्यक प्रक्रियागत अड़चनों का सामना न करना पड़े। इन सुधारों से निर्यातकों सहित विभिन्न श्रेणियों के करदाताओं को राहत मिलने और राज्य की आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है।