दैनिक खबरनामा | चंडीगढ़, 10 अगस्त 2026. पंजाब में नहरी सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने और तेजी से गिरते भूजल को बचाने की दिशा में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। जल संसाधन एवं भूमि व जल संरक्षण मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने विधानसभा में बताया कि राज्य में अब तक 19,316 खाल बहाल किए जा चुके हैं, जबकि 1,687 स्थानों पर पहली बार नहरी पानी पहुंचाया गया है।

विधायक दविंदरजीत सिंह लाडी ढोस द्वारा नहरों और खालों की बहाली के लिए सरकार के प्रयासों की सराहना के लिए पेश किए गए प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान यह जानकारी सामने आई। पंजाब विधानसभा ने इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित किया।

बरिंदर कुमार गोयल ने कहा कि पंजाब ने देश की खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, लेकिन कृषि के लिए भूजल पर अत्यधिक निर्भरता के कारण राज्य के जल संसाधनों पर गंभीर दबाव पड़ा है। इसी चुनौती को देखते हुए सरकार ने नहरी सिंचाई का दायरा बढ़ाने और खेतों तक अधिक से अधिक नहरी पानी पहुंचाने की रणनीति अपनाई है।

उन्होंने कहा कि पहले खालों और भूमिगत पाइपलाइनों के निर्माण या बहाली में किसानों को लागत का 10 प्रतिशत हिस्सा देना पड़ता था, जबकि 90 प्रतिशत खर्च सरकार उठाती थी। आर्थिक कठिनाइयों के कारण कई किसान अपना हिस्सा नहीं दे पाते थे, जिससे अनेक परियोजनाएं अधर में रह जाती थीं।

मंत्री ने बताया कि वर्ष 2023 में मान सरकार ने किसानों का 10 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह माफ कर दिया और ऐसे कार्यों की पूरी लागत सरकार द्वारा वहन करने का फैसला किया। इसके बाद खालों की बहाली और भूमिगत पाइपलाइन बिछाने के कार्य में तेजी आई।

गोयल ने कहा कि बहाल किए गए 19,316 खालों में कई ऐसे थे, जो सरकारी रिकॉर्ड में तो मौजूद थे, लेकिन जमीन पर लगभग समाप्त हो चुके थे। स्थानीय लोगों के सहयोग से इन्हें दोबारा कार्यशील बनाया गया और लंबे समय से नहरी पानी से वंचित क्षेत्रों तक सिंचाई सुविधा पहुंचाई गई।

सरहाली डिस्ट्रीब्यूटरी का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि लगभग छह किलोमीटर लंबी एक माइनर, जो जमीन के नीचे दबकर लगभग समाप्त हो गई थी, को बहाल किया गया। अब यह नौरंगाबाद, कैरों, बनीवाला, जमालपुर, मियांविंड, आसल उताड़, भोरे कोना, सरहाली और नौशहरा पन्नुआं सहित कई गांवों को पानी उपलब्ध करा रही है तथा करीब 4,737 एकड़ क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिल रही है।

जल संसाधन मंत्री ने कहा कि सरकार ने केवल नई नहरों पर निर्भर रहने के बजाय मौजूदा नहरों की क्षमता भी बढ़ाई है। सरहिंद फीडर और फिरोजपुर फीडर सहित प्रमुख नहरों को चौड़ा और गहरा करके उनकी जल वहन क्षमता में वृद्धि की गई है।

उन्होंने बताया कि राज्य की नहरी प्रणाली की क्षमता अब लगभग 36,000 क्यूसेक हो गई है, जबकि पानी का प्रवाह लगभग 39,000 क्यूसेक तक पहुंच रहा है। इससे अनेक क्षेत्रों में सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

गोयल ने कहा कि सरकार ने ऊंचे और पहाड़ी क्षेत्रों को भी नहरी सिंचाई के दायरे में लाने पर विशेष ध्यान दिया है। काठगढ़ में 135 करोड़ रुपये की लागत से लिफ्ट सिंचाई परियोजना शुरू की गई, जिसके माध्यम से लगभग 70 फुट ऊंचाई पर स्थित क्षेत्रों तक पानी पहुंचाया गया और करीब 11,737 एकड़ क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिली।

कादियां क्षेत्र में रिआड़की डिस्ट्रीब्यूटरी को 30.50 करोड़ रुपये की लागत से मजबूत किया गया। इसकी क्षमता 216 क्यूसेक से बढ़ाकर 385 क्यूसेक की गई और लगभग 5.5 किलोमीटर क्षेत्र में कंक्रीट लाइनिंग की गई। इस परियोजना से करीब 43,000 एकड़ क्षेत्र तक सिंचाई के लिए पानी पहुंचने का दावा किया गया है।

मंत्री ने कहा कि नहरी सिंचाई के विस्तार का सकारात्मक प्रभाव भूजल पर भी दिखाई दे रहा है। केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि पंजाब के 153 ब्लॉकों में से 74 ब्लॉकों यानी लगभग 48 प्रतिशत में भूजल की स्थिति में सुधार देखा गया है। उन्होंने कहा कि पांच ब्लॉक गंभीर जल संकट वाली श्रेणियों से बेहतर श्रेणियों में पहुंचे हैं।

बरिंदर कुमार गोयल ने कहा कि नहरों और खालों की बहाली, भूमिगत पाइपलाइनों तथा कंक्रीट लाइनिंग के माध्यम से पंजाब में सिंचाई का मजबूत नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य किसानों की नहरी पानी पर निर्भरता बढ़ाने के साथ-साथ भूजल पर दबाव कम करना है।

पानी के बंटवारे के मुद्दे पर मंत्री ने स्पष्ट किया कि पंजाब देश की खाद्य सुरक्षा में अपना योगदान देता रहा है, लेकिन अपने जल संसाधनों की रक्षा करना भी उसकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि पंजाब अपने उचित हिस्से से अधिक पानी की एक बूंद भी नहीं देगा।

उन्होंने बताया कि आपात स्थिति के दौरान हरियाणा की पेयजल, पशुधन और थर्मल पावर प्लांटों की जरूरतों को देखते हुए हरियाणा द्वारा मांगे गए 4,000 क्यूसेक पानी में से पंजाब ने अपने हिस्से से पानी उपलब्ध करवाकर मानवीय दृष्टिकोण का परिचय दिया।

मंत्री ने पंजाब के लोगों से पानी का विवेकपूर्ण उपयोग करने और इसकी बर्बादी रोकने की अपील की। उन्होंने कहा कि पानी की हर बूंद बचाना आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

बरिंदर कुमार गोयल ने कहा कि टेलों, टिब्बों और पहाड़ी क्षेत्रों तक नहरी पानी पहुंचाना केवल सिंचाई सुविधा का विस्तार नहीं बल्कि पंजाब के भूजल संरक्षण और कृषि के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

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