दैनिक खबरनामा। नई दिल्ली, 16 अगस्त: 15 अगस्त को कांग्रेस के राष्ट्रीय मुख्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान कथित रूप से “वंदे मातरम्” को पूरा न गाने देने को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज और पश्चिम बंगाल के नैहाटी से बीजेपी विधायक सुमित्रो चटर्जी ने इस मामले में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी से बिना शर्त माफी की मांग की है।
चटर्जी ने पत्र में कहा कि कार्यक्रम के दौरान जब राष्ट्रगीत की पूरी रचना प्रस्तुत की जा रही थी, तो मंच पर असहजता देखी गई और इसे बीच में रोकने के प्रयास किए गए। पीटीआई के हवाले से उन्होंने इसे केवल एक चूक नहीं, बल्कि इतिहास में हुई एक गलती को जानबूझकर दोहराना करार दिया।
पत्र में क्या लिखा
सोनिया गांधी को संबोधित पत्र में बीजेपी विधायक ने खुद को एक आम नागरिक, राष्ट्रभक्त और बंकिम चंद्र का सीधा उत्तराधिकारी बताया। उन्होंने लिखा कि इस घटना से उन्हें गहरा आघात और पीड़ा हुई है।
चटर्जी ने श्री अरबिंदो के उस कथन का उल्लेख किया जिसमें उन्होंने वंदे मातरम् को राष्ट्रभक्ति का मूल मंत्र बताया था। उनके अनुसार, आजाद भारत में इस गीत के पूर्ण पाठ से कतराना उन क्रांतिकारियों का अपमान है जिन्होंने देश के लिए प्राण दिए, जैसे खुदीराम बोस।
उन्होंने कांग्रेस के इतिहास में इस गीत की भूमिका भी गिनाई। 1896 के कलकत्ता अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा इसका गायन, 1905 के बनारस अधिवेशन में सरला देवी चौधरानी का प्रस्तुतीकरण, 1909 में तिलक के मुकदमे के दौरान समर्थकों द्वारा नारा लगाना और 1938 में हैदराबाद की उस्मानिया यूनिवर्सिटी में छात्रों द्वारा पाबंदियों के बावजूद इसे गाना — इन सभी घटनाओं का जिक्र पत्र में किया गया।
“दोहरे रवैये” का आरोप
सुमित्रो चटर्जी ने कांग्रेस पर पुराना रुख दोहराने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 1937 में मोहम्मद अली जिन्ना के विरोध के बाद पार्टी ने वंदे मातरम् का संक्षिप्त संस्करण अपनाया था। उनकी राय में 15 अगस्त के कार्यक्रम में वही मानसिकता फिर नजर आई।
उन्होंने सवाल उठाया कि कांग्रेस की शीर्ष नेतृत्व को इस गीत से दिक्कत क्यों है। साथ ही पश्चिम बंगाल छात्र परिषद का नाम लेते हुए कहा कि वंदे मातरम् किसी दल की जागीर नहीं है। यह बंकिम चंद्र की देन और देश की साझा विरासत है। यह उन शहीदों की कुर्बानी का प्रतीक है जिन्होंने आजादी दिलाई।
चटर्जी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि इतिहास किसी को माफ नहीं करता। जो लोग अपने ही स्वतंत्रता आंदोलन के प्रतीक का सम्मान नहीं कर सकते, उन्हें अंततः विस्मृति का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इस घटना से बंगाल के लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं और सोनिया गांधी को देश और खासकर बंगाल से सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगनी चाहिए।
क्या है पूरा मामला
विवाद की शुरुआत कांग्रेस के एक कार्यक्रम के वीडियो से हुई। वीडियो में सोनिया गांधी को मंच पर पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से बात करते देखा गया। इसी समय पृष्ठभूमि में वंदे मातरम् बज रहा था। आरोप है कि इस दौरान गांधी और खरगे ने कथित तौर पर गीत को रुकवाने का इशारा किया।
कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज किया है। पार्टी का कहना है कि सोनिया गांधी खरगे के लिए कुर्सी की व्यवस्था करवा रही थीं, गीत को रोकने का कोई इरादा नहीं था।