दैनिक खबरनामा। चंडीगढ़, 17 अगस्त: भारतीय जनता पार्टी अब सिर्फ पद बदलने के लिए राष्ट्रीय संगठन में फेरबदल नहीं कर रही। पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन की अगुवाई में बन रही नई टीम को 2029 के लोकसभा चुनाव और बीच में होने वाले विधानसभा चुनावों की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
पार्टी ने मई में संगठनात्मक बदलाव की शुरुआत कर दी थी। उस दौरान हरियाणा, पंजाब, दिल्ली और त्रिपुरा में प्रदेश अध्यक्ष बदले गए थे। अब राष्ट्रीय स्तर पर अनुभवी नेताओं के साथ नए और युवा चेहरों को जगह देने की चर्चा तेज है।
हरियाणा के लिए सवाल संख्या नहीं, भूमिका का है
हरियाणा को राष्ट्रीय टीम में कितनी सीटें मिलेंगी, यह मुद्दा उतना अहम नहीं माना जा रहा जितना यह कि किस नेता को ऐसी जिम्मेदारी सौंपी जाए जिसका उपयोग पार्टी राज्य के साथ-साथ अन्य राज्यों में भी कर सके।
इस लिहाज से सबसे मजबूत दावेदार ओमप्रकाश धनखड़ हैं। वह अभी भाजपा के राष्ट्रीय सचिव हैं और संगठन के कामकाज में लगातार सक्रिय दिखते हैं। कई राज्यों में पार्टी कार्यक्रमों और चुनावी तैयारियों में वह भाजपा का पक्ष रख चुके हैं।
केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर और हरियाणा राज्य सार्वजनिक उपक्रम ब्यूरो के चेयरमैन व पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली के नाम पर भी मंथन चल रहा है। गुर्जर की पार्टी के भीतर अच्छी पकड़ मानी जाती है।
महिला नेतृत्व और संसदीय अनुभव पर फोकस
पूर्व सांसद डॉ. सुधा यादव का नाम भी अहम है। वह भाजपा संसदीय बोर्ड की सदस्य हैं, जो पार्टी का सबसे बड़ा निर्णय लेने वाला मंच है। ऐसे में हरियाणा के प्रतिनिधित्व पर बात करते समय उन्हें नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा। उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर कोई बड़ी जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना जताई जा रही है।
सिरसा से पूर्व सांसद सुनीता दुग्गल भी चर्चा में हैं। वह पहले प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में थीं, लेकिन अब उन्हें प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता की टीम में उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली है। पार्टी उन्हें भी राष्ट्रीय पटल पर आजमा सकती है।
संगठन के पुराने और नए चेहरे
राज्यसभा सदस्य और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला के पास लंबा संगठनात्मक अनुभव है। उनके प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए हरियाणा में भाजपा का विस्तार हुआ था। अभी वह राज्यसभा सदस्य के तौर पर राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय हैं।
इसी तरह राज्यसभा सदस्य संजय भाटिया का नाम भी संभावित सूची में है। वह अप्रैल 2026 से राज्यसभा में हरियाणा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और उन्हें संगठन व चुनाव प्रबंधन का अनुभव है।
पूर्व मंत्री कैप्टन अभिमन्यु पहले भी राष्ट्रीय संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं, इसलिए उन्हें भी मौका मिल सकता है।
राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा का मामला अलग है। वह पूर्व राष्ट्रीय महिला आयोग अध्यक्ष रह चुकी हैं। महिला मुद्दों और सार्वजनिक जीवन का अनुभव उन्हें राष्ट्रीय टीम में अलग पहचान देता है।
जातीय समीकरण से आगे की सोच
मई में डॉ. अर्चना गुप्ता को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर पार्टी ने महिला नेतृत्व को आगे बढ़ाया था। राष्ट्रीय स्तर पर भी नए चेहरों, युवाओं और महिलाओं को तरजीह देने की बात चल रही है। इसका मतलब यह हो सकता है कि हरियाणा से किसी ऐसे नेता को मौका मिले जो अभी राष्ट्रीय संगठन में बड़ी भूमिका में नहीं है।
केंद्रीय राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह का मामला थोड़ा अलग है। वह केंद्र में मंत्री हैं और दक्षिण हरियाणा में उनका प्रभाव मजबूत है। लेकिन राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने गुरुग्राम में अपनी आपत्तियां रखने के बाद उनके संगठन में आने की संभावना कम मानी जा रही है।
कुल मिलाकर नई राष्ट्रीय टीम में हरियाणा की हिस्सेदारी तय करते समय पार्टी चुनावी उपयोगिता, संगठनात्मक अनुभव और सामाजिक संतुलन — तीनों को तौल रही है।