दैनिक खबरनामा। चंडीगढ़, 19 अगस्त: शहर के सरकारी स्कूलों में अध्यापकों की कमी का समाधान अभी दूर दिख रहा है। न तो भर्ती के लिए कोई एजेंसी तैयार हुई है और न ही डेपुटेशन के जरिए पद भरने के लिए कोई सूची आई है। नतीजा यह कि कक्षाओं में पढ़ाने वाले हाथ कम होते जा रहे हैं।
शिक्षा विभाग ने शिक्षक भर्ती के लिए आउटसोर्सिंग एजेंसी तय करने के मकसद से अब तक तीन बार टेंडर प्रक्रिया अपनाई, लेकिन हर बार नाकामी हाथ लगी। कोई भी एजेंसी सामने नहीं आई।
इसी बीच डेपुटेशन कोटे से 94 पद भरने की कवायद भी ठप है। इन पदों में अध्यापक, प्रिंसिपल और हेडमास्टर शामिल थे। विभाग ने पंजाब और हरियाणा दोनों से 14 अगस्त तक नामों की सूची मांगी थी। तय तारीख निकल जाने के बाद भी पंजाब की तरफ से एक भी नाम नहीं भेजा गया। हरियाणा ने 17 पदों के मुकाबले 40 नाम जरूर भेजे हैं।
अगर यही स्थिति रही तो अप्रैल 2027 तक चंडीगढ़ के स्कूलों में स्टाफ की दिक्कत और बढ़ जाएगी।
1991 वाला 60:40 फॉर्मूला भी बना बाधा
साल 1991 से स्कूल शिक्षा विभाग के 820 पदों पर पंजाब और हरियाणा से 60:40 के अनुपात में नियुक्तियां होती आ रही हैं। यानी 60 फीसदी स्टाफ पंजाब से और 40 फीसदी हरियाणा से। अभी दोनों ही राज्यों में अपने यहां शिक्षकों की कमी है, इसलिए चंडीगढ़ के लिए अतिरिक्त स्टाफ भेज पाना उनके लिए मुश्किल हो गया है।
केंद्रीय सेवा नियम से नई उलझन
चंडीगढ़ में केंद्रीय सेवा नियम लागू होने के बाद डेपुटेशन पर आने वाले कर्मचारियों की सेवा अवधि को 3, 5 और 7 साल तक सीमित कर दिया गया है। अप्रैल 2027 में जिन शिक्षकों की 5 साल की अवधि पूरी हो जाएगी उन्हें वापस भेजने की तैयारी है। यानी जिस समय विभाग को सबसे ज्यादा स्टाफ की जरूरत होगी, उसी वक्त बड़ी संख्या में शिक्षक लौट जाएंगे।
भर्ती-पदोन्नति के नियम अब भी अधर में
केंद्रीय सेवा नियम लागू होने के बावजूद विभाग में भर्ती और प्रमोशन के नियम अभी तय नहीं हो पाए हैं। प्रिंसिपल के पद तक सृजित नहीं हैं। स्कूलों में टीजीटी और पीजीटी शिक्षकों की भारी कमी के कारण पढ़ाई और प्रबंधन दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
यूनियनों ने उठाई आवाज
ज्वाइंट एक्शन कमेटी कर्मचारी यूनियन के चेयरमैन भाग सिंह खैरों ने कहा कि डेपुटेशन कोटा खत्म किया जाए। केंद्र सरकार से मांग है कि चंडीगढ़ अपना खुद का कैडर बनाकर भर्ती करे ताकि कमी पूरी हो सके।
गवर्नमेंट टीचर्स यूनियन की अध्यक्ष संतोष ने कहा कि डेपुटेशन पर शिक्षक लाने से यूटी कैडर के अध्यापकों की पदोन्नति रुक गई है। सैकड़ों शिक्षक बिना प्रमोशन के रिटायर हो चुके हैं। प्रशासन से अपील है कि केंद्रीय सेवा नियम के तहत भर्ती नियम तय कर नई नियुक्तियां और पदोन्नति की जाए। डेपुटेशन के भरोसे विभाग नहीं चल सकता।
यूटी कैडर इंप्लाइज यूनियन के अध्यक्ष स्वर्ण सिंह कंबोज ने कहा कि डेपुटेशन कोटा तुरंत खत्म होना चाहिए। चंडीगढ़ प्रशासन को अपनी भर्ती प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। पैनल का न आना और भर्ती एजेंसी का न मिलना गंभीर विषय है।