दैनिक खबरनामा। जम्मू, 02 नवंबर: केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में शराब की बिक्री और स्थानीय शराब को प्रोत्साहन देने के मुद्दे पर विवाद बढ़ता जा रहा है। ऑल लद्दाख होटल्स एंड बार्स एसोसिएशन और ऑल लद्दाख लिकर ट्रेडर्स एसोसिएशन ने पर्यावरणविद सोनम वांगचुक पर शराब के मसले पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया है।
कारोबारियों का कहना है कि एक तरफ वांगचुक शराब मुक्त लद्दाख की मांग करने वालों के साथ धरने पर बैठते हैं, तो दूसरी तरफ स्थानीय शराब चांग को बढ़ावा देने और माइक्रोब्रुअरी को टैक्स में राहत देने की बात करते हैं।
बता दें कि 28 अक्टूबर को सोनम वांगचुक लेह के एनडीएस मेमोरियल पार्क में शराब मुक्त लद्दाख की मांग को लेकर धरने पर बैठी महिलाओं के समर्थन में पहुंचे थे। उस दौरान उन्होंने लद्दाख की पारंपरिक शराब चांग को स्थानीय संस्कृति का हिस्सा बताते हुए इसे तुलनात्मक रूप से बेहतर और सेहतमंद विकल्प कहा था। साथ ही प्रशासन से आग्रह किया था कि स्थानीय युवाओं को गेहूं से शराब बनाने वाली आधुनिक माइक्रोब्रुअरी लगाने में सहयोग दिया जाए और ऐसी यूनिट्स को टैक्स में छूट दी जाए।
केवल लाइसेंसी कारोबारियों को निशाना बनाना गलत
इसके बाद लेह में की गई प्रेस वार्ता में शराब कारोबारियों ने वांगचुक के बयान पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि यदि लद्दाख को शराब मुक्त करना है, तो यह नियम हर तरह की शराब पर एक समान लागू होना चाहिए। सिर्फ लाइसेंस लेकर कारोबार करने वालों को निशाना बनाना सही नहीं है।
व्यापारियों ने सवाल उठाया कि जब समाज में ड्रग्स, सिगरेट और मांस भी मौजूद हैं, तो केवल शराब के खिलाफ ही मुहिम क्यों छेड़ी जा रही है? उन्होंने वांगचुक पर चुनिंदा मुद्दों पर सक्रियता दिखाने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें कारोबारियों की रोजी-रोटी के मामले में दखल नहीं देना चाहिए।
एसोसिएशन ने साफ किया कि शराब का कारोबार पूरी तरह वैध और लाइसेंस प्राप्त व्यवसाय है और इसे मुस्लिम, बौद्ध, ईसाई और हिंदू समुदाय के लोग चला रहे हैं। इसे किसी एक समुदाय से जोड़कर देखना गलत है।
प्रशासन कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा?
कारोबारियों ने बताया कि कई लाइसेंस धारकों ने दुकान, स्टॉक और अन्य व्यवस्थाओं पर लाखों रुपये निवेश किए हैं। कुछ ने तो एक महीने से भी कम समय पहले ही अपना कारोबार शुरू किया है। ऐसे में शराब पर पाबंदी की मांग से उनकी आजीविका पर सीधा असर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि यदि मांस, सिगरेट और अन्य नशीले पदार्थों पर भी एक जैसे नियम लागू किए जाते हैं, तो उन्हें पूर्ण प्रतिबंध पर भी एतराज नहीं होगा। कारोबारियों ने सोनम वांगचुक के पैतृक गांव उले टोपो में उनके परिवार से जुड़ी सेब की वाइन उले टोपो का मुद्दा भी उठाया।
उनका सवाल था कि क्या इस वाइन के उत्पादन और बिक्री के लिए जरूरी व्यावसायिक लाइसेंस लिया गया है? यदि नहीं, तो प्रशासन ने अब तक इस पर कदम क्यों नहीं उठाया?
व्यापारियों का आरोप है कि एक तरफ लाइसेंस लेकर काम करने वालों पर सवाल उठाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर बनने वाली वाइन की बिक्री पर कोई कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है। हालांकि, वाइन के लाइसेंस और प्रशासनिक निगरानी से जुड़े इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।