चंडीगढ़ 6 जनवरी (जगदीश कुमार)चंडीगढ़ की सेशन कोर्ट ने सेक्टर-49 में हुई स्नेचिंग और मारपीट के एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए आरोपी सागर को बरी कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आपराधिक मामलों में केवल शक के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जब तक आरोप पूरी तरह और ठोस सबूतों के साथ साबित न हों।कोर्ट के समक्ष सुनवाई के दौरान इस मामले में मुख्य गवाह आरोपी की पहचान करने से मुकर गया, जिससे अभियोजन पक्ष की पूरी कहानी कमजोर पड़ गई। सरकारी वकील आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा। ऐसे में कोर्ट ने आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का आदेश दिया।अदालत ने अपने फैसले में यह भी उल्लेख किया कि पुलिस द्वारा जिस चाकू की बरामदगी दिखाई गई, उसके इस वारदात में इस्तेमाल होने का कोई पुख्ता प्रमाण पेश नहीं किया जा सका। चाकू पर खून के कोई निशान नहीं पाए गए, न ही कोई फॉरेंसिक या अन्य साक्ष्य मौजूद था, जिससे यह साबित हो सके कि उसी हथियार का उपयोग अपराध में किया गया था।इसके अलावा कोर्ट ने यह भी गंभीर टिप्पणी की कि खुलासा बयान और बरामदगी के समय किसी भी स्वतंत्र गवाह को शामिल नहीं किया गया, जिससे पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े होते हैं। अदालत ने कहा कि सबूतों की श्रृंखला पूरी नहीं बन पाई और कई महत्वपूर्ण कड़ियां गायब रहीं।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आपराधिक कानून के तहत यह कहना पर्याप्त नहीं है कि आरोपी ने अपराध “शायद” किया हो। अभियोजन पक्ष को यह निर्विवाद रूप से सिद्ध करना होता है कि अपराध आरोपी ने ही किया है। इस मामले में ऐसा नहीं हो सका।
गौरतलब है कि यह मामला थाना सेक्टर-49, चंडीगढ़ में 8 मई 2025 को दर्ज एफआईआर से जुड़ा था। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 309(6),126(2) और 311 के तहत केस दर्ज किया था।अंततः सभी तथ्यों और सबूतों पर विचार करने के बाद सेशन कोर्ट ने आरोपी सागर को बरी कर दिया, जिससे एक बार फिर यह संदेश गया कि न्याय व्यवस्था में ठोस सबूतों का होना सबसे आवश्यक है, न कि केवल संदेह।